Wednesday, November 21, 2018
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दिव्यांग लोगों के लिए यात्रा सक्षम करनाः आसान नहीं, लेकिन संभव है

3 दिसंबर को वल्र्ड डिसएबिलिटी डे के अवसर पर, यहां प्रस्तुत है दिव्यांग लोगों के लिए भारत को अधिक सुगम बनाने के लिए उठाए गए नवीन कदमों और अनूठी पहल की जानकारी। देबोलिन सेन का एक लेख, जो कि भारत के नवीनतम सुलभ पर्यटन मंच इनेबल ट्रैवल के एक विशेषज्ञ हैं।

अभी यह पिछले महीने की ही बात है जब दिव्यांगों के अधिकारों से जुडे सक्रिय कार्यकर्ता और एक व्हीलचेयर उपयोगकर्ता सुश्री विराली मोदी ने मुंबई में लगभग 20़ शीर्ष रेस्तरांओं का दौरा किया और पाया कि उनमें से केवल 5 में ही रैंप थे, ताकि एक व्हीलचेयर उपयोगकर्ता बिना किसी सहायता के वहां प्रवेश कर सके। इससे मुंबई में विकलांगों के प्रति जागरूकता की कमी का संकेत मिलता है। अगर मुंबई में यह हाल है तो अन्य जगहों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। भारत में लोग जब देखते हैं कि विकलांग व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता है, तो वे तुरंत उसकी मदद करते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत स्तर पर सहायता प्रदान करना विकलांग लोगों को स्वतंत्र बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब वे अपने घर से बाहर निकलते हैं। हमें भारत के किसी भी शहर में उन्हें स्वतंत्र रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जानेे के लिए सक्षम बनाने में मदद करने के लिए रेलवे स्टेशन, बसों, हवाईअड्डे, थिएटर, होटल, सार्वजनिक शौचालय जैसे अधिक सुगम स्थान बनाने की जरूरत है।
2011 की भारतीय जनगणना के मुताबिक, भारतीय आबादी में 20.3 प्रतिशत लोग व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं, 18.8 प्रतिशत दृष्टिहीन हैं, 18.9 प्रतिशत को कम सुनाई देता है और 7.5 प्रतिशत लोग बोल नहीं पाते। यह वास्तव में दुख की बात है कि जब ज्यादातर भारतीयों के लिए सफर करना जिंदगी को जीने का तरीका बन गया है, तो भी हमारी कुल आबादी का 2.2 प्रतिशत हिस्सा बनने वाले विकलांग लोगों की यात्रा के हितों और आकांक्षाओं की खोज की जरूरत भी नहीं समझी गई है।
विराली ने एक्सेसिबल टूरिज्म प्लेटफाॅर्म इनेबल ट्रेवल के सहयोग से एक आॅनलाइन याचिका के रूप में रुरैंपमाईरेस्टाॅरेंट अभियान छेडा और अब उम्मीद बंधी है कि नेशनल रेस्टाॅरेंट ऐसोसिएशन आॅफ इंडिया, पर्यटन मंत्रालय और सामाजिक कल्याण मंत्रालय इस मामले की तरफ प्राथमिकता से ध्यान देंगे।
इससे पहले उसने रेलवे को इस बात के लिए तैयार किया कि रेलवे स्टेशनों पर विकलांगों के लिए फोल्डेबल व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाए और उनके लिए रैंप तैयार किए जाएं, ताकि वे लोग आसानी से आवागमन कर सकें। आज हमारा देश धीरे-धीरे एक ऐसा देश बनता जा रहा है जहां दिव्यांग लोगों के लिए मैत्रीपूर्ण माहौल है; दिव्यांगों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले लोगों के प्रयासों के कारण एक ऐसा माहौल संभव हो पाया है जहां लोग सोचने लगे हैं कि दिव्यांग लोगों को भी हमारी तरह ही साधारण जीवन सुगमता से जीने का अधिकार है। लेकिन यह यात्रा जितनी आसान लगती है, उतनी आसान नहीं है।
इनेबल ट्रेवल द्वारा पूरे देश में दिव्यांग यात्रियों की जरूरतों के बारे में किए गए अध्ययन में 100 से अधिक विकलांग उत्तरदाताओं से सवाल-जवाब किए गए। इस अध्ययन से पता चलता है कि सभी दिव्यांग यात्री सफर और सैर-सपाटे का आनंद उठाना चाहते हैं, हालांकि तमाम किस्म की रुकावटें उनकी इस ख्वाहिश के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न करती हैं। इन बाधाओं में प्रमुख हैं- जानकारी और समर्थन तक पहुंच की कमी, दिव्यांग लोगों के लिए सीमित होटल के कमरे, उपयुक्त परिवहन की कमी, जिम, स्पा और स्विमिंग पूल जैसे अनुभवों तक पहुंच की मुश्किलें, स्मारकों और स्थलों के आसपास शौचालयों की कमी, आदि। अध्ययन में विकलांग यात्रियों ने अपनी कुछ स्पष्ट मांगों का खुलासा भी किया, जैसे व्हीलचेयर पर निर्भर लोगों में से 90 प्रतिशत उत्तरदाता सीढ़ियों वाले रेस्तरां पसंद नहीं करते, सुनऩे में अक्षम 100 प्रतिशत उत्तरदाता ऐसे होटल पसंद करते हैं जहां जरूरी विजुअल अलर्ट डिवाइस लगे हों और 90 प्रतिशत दृष्टिहीन उत्तरदाता एक पूर्व-नियोजित यात्रा पसंद करते हैं।
दरअसल हमें यह समझना होगा कि विकलांग लोगों को भी समान अवसरों के साथ जीवन जीने के पूर्ण अधिकार हैं। इन अवसरों तक पहुंचने के लिए यात्रा करने की क्षमता प्रमुख कारकों में से एक है। इसलिए इनेबल ट्रेवल जैसे प्लेटफार्म उनकी यात्रा को बाधा रहित बनाने और विकलांग लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वर्तमान में, इनेबल ट्रेवल व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले, दृष्टिहीन और मूक-बधिर लोगों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास कर रही है, ताकि वे आपकी और हमारी तरह ही पूरी आजादी, इच्छा और गरिमा के साथ यात्रा कर सकें। इनेबल ट्रैवल ने सक्षम विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया है और ये ऐसे लोग हैं जो स्वयं भी दिव्यांग हैं और जिन्होंने इस प्रोडक्ट के विकास में योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त, इनेबल ट्रैवल ने भारत में विकलांग लोगों की दुनिया के कामयाब लोगों को भी अपने से जोडा है, जो बाधाओं को तोड़ने और तलाशने, अनुभव और यात्रा के लिए दिव्यांग लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
इनेबल ट्रेवल जैसी पहल सरकार के ‘‘एक्सेसेबल इंडिया‘‘ अभियान के अनुरूप हैं जो कि विकलांग लोगों के लिए पूरी तरह से पहुंच वाले पर्यटकों के अनुकूल स्थानों को बनाने की कोशिश करते हैं। अधिकांश 5 सितारा होटल और महानगरों के नए हवाईअड्डे विकलांग लोगों के लिए भी सुलभ हैं। कई पर्यटन स्थल जैसे गोवा के समुद्र तट, महाराष्ट्र में अजंता-एलोरा की गुफाएं, आगरा का ताजमहल और दिल्ली में कुतुब मीनार पहले ही दिव्यांग लोगों के अनुकूल बन गए हैं। इस सूची में और स्थानों को जोड़ने के लिए प्रयास चल रहे हैं।
हास्पिटेलिटी इंडस्ट्री, विशेष रूप से पांच सितारा होटल श्रृंखला और कुछ चार सितारा होटल भी इस दिशा में आगे आए हैं और इस मुद्दे पर कार्रवाई शुरू कर चुके हैं। हालांकि, जरूरत इस बात की है कि सभी हितधारक इस मामले में अपना योगदान करें और दिव्यांगों के लिए यात्रा को सक्षम बनाएं। यदि होटल अपनी वेबसाइटों पर दिव्यांगों के लिए सुलभ कमरों और बाथरूम की स्पष्ट तस्वीरों को प्रदर्शित कर सकते हैं और ऐसे ग्राहकों के जरूरी सवालों के जवाब देने के लिए अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर सकते हैं, तो इस समस्या को काफी हद तक हल किया जा सकता है। दिव्यांग लोग अधिकांश मौजूदा शौचालयों का इस्तेमाल कर सकते हैं अगर उनमें थोडा सा परिवर्तन कर दिया जाए, जैसे कि उनमें स्लाइडिंग दरवाजों की फिटिंग हो और व्हीलचेयर को घुमाने के लिए कमरे में पर्याप्त जगह हो। इसी तरह ब्रेल में निर्देश पुस्तिकाएं होंगी तो इससे निश्चित रूप से दृष्टिहीन यात्रियों को मदद मिलेगी।
इस दिशा में सभी क्षेत्रों, टूर ऑपरेटरों, एयरलाइंस, हवाईअड्डे, दर्शनीय स्थलों की स्थिति, होटल, रेस्तरां, मनोरंजन और चेन में शामिल सभी को मिलजुल कर काम करने की आवश्यकता है। हालांकि, सेवा प्रदाताओं के सामने मुश्किल यह है कि इस श्रेणी के सभी लोगों की जरूरतों को किस प्रकार पूरा किया जाए, क्यांेकि विकलांगता का स्तर भी अलग-अलग है और लोगों की जरूरतें भी अलग किस्म की होती हैं। हमें उम्मीद है कि इसे एक सहज अनुभव बनाने के लिए कई और अधिक सेवा प्रदाता इस मुहिम में शामिल होंगे। बहुत कुछ करने की जरूरत है। नजरिया कुछ ऐसा हो कि यह किसी एक व्यक्ति की अलग-अलग आधार पर मदद करने के बजाय सभी लोगों की मदद कर सके। हमें यह समझने की जरूरत है कि इस मुद्दे पर पहल करते हुए हमें न केवल हमारे विकलांग मित्रों की तरफ बड़े पैमाने पर ध्यान देने की जरूरत है, बल्कि हमें उनके पूर्णतः सक्षम साथी की तरफ भी ध्यान देना होगा, ताकि हमारे देश का हरेक दिव्यांग इस दुनिया को खोजने के लिए जरूरी आत्मविश्वास जुटा सके।

 

 

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