Thursday, December 13, 2018
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जत्थेदार संतोख सिंह जैसी बहुमुखी व्यक्तित्व के मालिक को आज की सिख सियासत में खोजना आसान कार्य नहींः डा.जसपाल सिंह

संवाददाता (दिल्ली) दिल्ली के सिख नेताओं की पंथक प्राप्तियों में से यदि जत्थेदार संतोख सिंह के कार्यकाल को बाहर कर दिया जाये तो शायद देश की राजधानी में बसते सिखों के शिक्षण एवं धार्मिक पक्ष में होशियार होने के सामने आते रूझान को मंजिल  तक नहीं पहुंचाया जा सकता था। इन विचारों को पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पूर्व वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जत्थेदार संतोख सिंह की 21 दिसम्बर को आ रही बरसी के संदर्भ में व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि पंथक हितों के पहरेदार बनकर लगभग 30वर्ष तक सिख सियासत के आकाश में ध्रुव तारे के रूप में छाये रहने वाले जत्थेदार का शारीरिक कद बेशक इतना बड़ा नहीं था पर सही मायनों में देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनके साथ कौम के मसलों पर बात करने के दौरान संकोच महसूस करती थी। क्योंकि जत्थेदार जब भी प्रधानमंत्री से मुलाकात करते थे तो केवल कौम की भलाई के ऐजेडें को आगे रखते थे। जिस कारण एक अवसर पर इंदिरा गांधी ने जत्थेदार की सियासी बलि लेने के लिए दिल्ली कमेटी का चुनाव लड़ने की योग्यता में मैट्रिक या ज्ञानी पास होने को अनिवार्य कर दिया था। परन्तु इंदिरा गांधी का यह सपना पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि जत्थेदार ने सिख हितों के लिए हर तरीका अपनाया जिसका सबूत एतिहासिक गुरुद्वारों की सेवा संभाल के साथ ही गुरुद्वारों की जायदादों तथा आसपास को संभालने के किये गये कार्य प्रमुख हैं। उन्होंने दावा किया कि जत्थेदार संतोख सिंह जैसी बहुमुखी प्रतिभा का मालिक आज की सिख सियासत में तलाश करना आसान कार्य नहीं है। इस अवसर पर जत्थेदार संतोख सिंह द्वारा गुरुद्वारों के साथ लगाई गई जमीनों, खालसा कॉलेजों तथा गुरू हरिकृष्ण पब्लिक स्कूलों की स्थापना के साथ ही कौम के स्वाभिमान को देश की राजधानी में बुलंद रखने के लिए किये गये कार्यो को याद किया।

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