Sunday, July 21, 2019
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ब्रह्मोत्सव फेस्टिवल दिल्ली में भारी जोश व उत्साह के साथ मनाया जाएगा

संवाददाता (दिल्ली) तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम (टीटीडी) मैनेजमेंट द्वारा स्थापित तिरुपति बालाजी मंदिर ने आज दिल्ली में नौ दिवसीय ब्रह्मोत्सव के जश्न की शुरुआत की। मई, 2015 में प्रारंभ किया गया ब्रह्मोत्सव हर साल दिल्ली के तिरुपति बालाजी मंदिर में भारी जोश व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस मंदिर में न केवल दिल्ली के बल्कि पूरे देश से भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के भक्त उनकी झलक पाने के लिए आएंगे। तिरुपति के पुजारी खास इस उद्देश्य के लिए दिल्ली आए हैं और 9 दिनों तक वो भगवान की पूजा करेंगे। प्रसाद भी सीधे तिरुपति से मंगाया गया है, जो यहां पर श्रृद्धालुओं को वितरित किया जाएगा।
वार्शिक ब्रह्मोत्सव भगवान वेंकटेश्वर के भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है क्योंकि इसकी शुरुआत स्वयं सृष्टि के निर्माता, भगवान ब्रह्मा ने की थी। भगवान ब्रह्मा स्वयं भगवान श्री वेंकटेश्वर के लिए उत्सव का आयोजन करते हैं, इसलिए इसे ‘ब्रह्मोत्सवम’ कहा जाता है।
दिल्ली में ब्रह्मोत्सव के जश्न के अवसर पर आंध्रप्रदेश के रेज़िडेंट कमिश्नर, श्री प्रवीण प्रकाश ने कहा, ‘‘इस साल दिल्ली में ब्रह्मोत्सव की तैयारी, योजना व व्यवस्था से जुड़ना सम्मान और गर्व की बात है। मैं दिल्ली और आसपास के षहरों के लोगों से आग्रह करता हूं कि वो इन 9 दिनों के उत्सव के दौरान मंदिर में आएं और हमारे साथ जश्न का आनंद लेते हुए भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करें।’’
टीटीडी मैनेजमेंट एवं आंध्रप्रदेश सरकार भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के हर उस भक्त तक पहुंचने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं, जो तिरुपति यात्रा करके भगवान के दर्शन करने में असमर्थ हैं। यह हमारे माननीय मुख्यमंत्री, चंद्रबाबू नायडू का विज़न है कि वो देश के हर शहर में जाकर ज्यादा से ज्यादा श्रृद्धालुओं तक पहुंचना और एक मिलियन से अधिक जनसंख्या वाले षहर में तिरुपति मंदिर स्थापित करना चाहते हैं। मुझे यह घोषणा करते हुए खुषी हो रही है कि हम 28 जून, 2018 को कुरुक्षेत्र में हाल ही में पूरे हुए तिरुपति मंदिर का उद्घाटन करेंगे।’’
दिल्ली के मंदिर की खास विशेषताओं में एक ध्यान मंदिर है, जिसमें 1000 लोगों की क्षमता के साथ एक विशाल आॅडिटोरियम है। इसमें कई हाॅल हैं, जिनमें से प्रत्येक में अद्वितीय विषेशताएं जैसे डांस हाॅल, याूगा हाॅल आदि हैं। इसका उपयोग शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत को बढ़ावा देने और योगा का अभ्यास करने के लिए किया जाता है। ये सभी सुविधाएं कला, संस्कृति, विज्ञान आदि के क्षेत्र में योगदान देने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा केवल 1000 रु. देकर उपयोग में लाई जा सकती हैं।

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