Monday, December 10, 2018
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सिखों के कथित कातिलों कें साथ साम्प्रादायिक सद्भाव की बात करना कांगेस की जुमलेबाजी : जी.के.

संंवाददाता (दिल्ली) 1984 सिक्ख कत्लेआम के कथित आरोपी जगदीश टाईटलर एवं सज्जन कुमार की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राजघाट में आयोजित किये गये उपवास पर शामिल होने का मामला गर्मा गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने साम्प्रादायिक भाईचारे की बहाली के लिए कांग्रेसीयों द्वारा की गई भूख हड़ताल को पाखण्ड करार दिया है।

जी.के. ने कहा कि सिखों के कथित कातिलों के साथ बैठ कर साम्प्रादायिक भाईचारे की बहाली की बात करना जुमलेबाजी है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के दायें-बांये दोनों को बैठाने से संकोंच करती हुई दोनों को वापिस भेजती है परन्तु फिर मीडिया में मामला आने के बाद दूसरी स्टेज पर बैठाती है। जिससे साफ झलकता है कि कांग्रेस दोनों नेताओं को कथित तौर पर सिख कत्लेआम का जिम्मेंदार मानती है पर वह गांधी परिवार के गुप्त भेद सार्वजनिक ना कर दें उससे डर कर उनको संरक्षण भी देती है। जी.के. ने राहुल गांधी को पाखण्ड की सियासत से दूर रह कर साम्प्रादायिक भाईचारे की बहाली के लिए दोनों नेताओं को कांग्रेस पार्टी से बाहर निकालने की भी नसीहत दी।
जी.के. ने सवाल किया कि दलितां पर अत्याचार के नाम पर भूख हड़ताल का दिखावा कर रहे कांग्रेसी नेताओं ने 1984 की विधवाओं के साथ हुआ शारीरिक एवं सामाजिक अत्याचार क्यों नहीं नजर आता ? जी.के. ने कहा कि गांधी परिवार का इतिहास हमेशा से साम्प्रादायिक भाईचारे को चिंगारी लगाने वाला रहा है। पंजाब के सिखों को हमेशा हिन्दु भाईचारे के खिलाफ लड़ाने की चालें कांग्रेस राज में शिखर पर रही है। इसलिए साम्प्रादायिक भाईचारे को बचाने के लिए यदि कांग्रेस फ्रिकमंद है तो सबसे पहले सिखों के कथित कातिलों को बाहर निकालने की हिम्मत दिखाये।

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