Sunday, July 21, 2019
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आर.एस.एस. को हमारा इतिहास लिखने की कोई आवश्यकता नहींः जी.के.

संवाददाता (दिल्ली) सिख गुरुओं की कुर्बानीयों भरे इतिहास को झुठलाने एवं सिखों को हिन्दु साबित करने की हो रही कोशिशों की दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने निंदा की है। कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने इन ओछी हरकत करने वाली हिन्दुवादी ताकतों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के मुख्यालय नागपुर के पते से चलते श्री भारती प्रकाशन द्वारा छापी गई किताबों में सिख गुरू साहिबानों को हिन्दु बताने एवं ऐतिहासिक तथ्यों को किताबों के माध्यम से बिगाड़ने की मीडिया द्वारा आई खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए जी.के. ने कहा कि आर.एस.एस. को हमारा इतिहास लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह सीधे तौर पर अलग पहचान वाले सिख धर्म की गौरवशाली छवि को भगवा चोला पहनाने के समान है, जिसे एक सच्चा सिख कभी भी स्वीकार नहीं कर सकता।

जी.के. ने कहा कि यदि आज हिन्दुस्तान में हिन्दु धर्म का अस्तित्व है तो उसके पीछे सिख गुरुओं की कुर्बानियों की बड़ी भूमिका है। आर.एस.एस. एवं उसके सहयोगी संगठनों को सिखों का इतिहास प्रदूषित करने के स्थान पर हिन्दु देवी-देवताओं के सकारात्मक इतिहास को अच्छी तरीके से पेश करते हुए नौजवानों को प्रेरणा देकर धार्मिक बनाना चाहिये, न कि दूसरे के दूध को अपना खट्टा लगा कर अपनी दही बताने की ओर चलना चाहिये।
उदासीन सम्प्रदाय के कथित संत नारायण दास की गुरु अर्जन देव जी के बारे सोशल मीडिया पर आई वीडियों को ऐतराजयोग्य बताते हुए जी.के. ने गुरु साहिब पर भगत साहिबानों की बाणी को बिगाड़ने के कथित साधू द्वारा लगाये गये आरोपों को दिमागी दिवालियेपन से जोड़ा। जी.के. ने कहा कि कुछ हिन्दुवादी ताकतें सिखों को अपने में समेटने के लिए हताशा की सीमा को लांघ चुकी है। इसलिए इनका मुख्य उद्देश्य सिखों को हिन्दु धर्म का हिस्सा बताने के लिए काम करने का रह गया है। जिसके चलते गुरुओं पर ब्राह्मणवादी दृष्टिकोण थोपने की कोशिश की जा रही है।
जी.के. ने इतिहास प्रदूषित करने वालों ठेकेदारों से कुछ सवाल भी पूछे। यदि सिख हिन्दु धर्म का हिस्सा है, तो सिख गुरुओं ने जात-पात, वर्ण-भेद, मूर्ति पूजा, ब्राह्मणी कर्मकांडों के बारे अपने विचार हिन्दु विचारधारा के उलट क्यां रखे ? गुरुनानक देव जी ने जनेऊ को धारण करने से इनकार क्यों किया था ? गुरुनानक साहिब ने 33 करोड़ देवी-देवताओं वाली हिन्दु विचारधारा के उलट एक ओंकार का सिद्धांत क्यों दिया था ? गुरु अर्जन देव जी ने आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश क्यों करवाया था ?
जिन भगत साहिबानों को जात के चलते हिन्दु विचारधारा मंदिर में दाखिल होने से रोकती थी, उनकी वाणी को आदि ग्रंथ में दर्ज कर गुरु साहिबानों की बाणी के साथ बराबर जगह क्यों दी थी ? गुरु तेगबहादर साहिब ने तिलक एवं जनेऊ को बचाने के लिए शहीदी क्यों दी, जबकि वो स्वंय इन धार्मिक चिन्हां को धारण नहीं करते थे ? गुरु गोबिन्द सिंह ने 1699 में बैसाखी पर खालसा धर्म की नींव रखकर बाणी एवं बाणे (पोशक) से जोड़ने का जो कार्य किया था, क्या वो सिख धर्म के अलग अस्तित्व का प्रतीक नहीं था ?

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