Saturday, April 20, 2019
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जमाअत इस्लामी हिन्द ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति के विवाद पर चिंता व्यक्त की

संवाददाता (दिल्ली) जमाअत इस्लामी हिन्द के मासिक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए जमाअत के महासचिव ने जजों की नियुक्ति के मामले में भारत सरकार के साथ सर्वोच्च न्यायालय के विवाद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों के बीच टकराव पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि न्यायालय द्वारा हालिया कुछ फैसलों को जमाअत परेशानी का कारण समझती है, क्योंकि ये फैसले अपराधी के संबंध में आम धारणाओं के विपरीत हैं और इन मुकदमों में पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है। बड़े पैमाने पर लंबित मुकदमों की वजह से इंसाफ दिलाने में देरी और महंगे इंसाफ की वजह से हिन्दुस्तानी अदलिया त्रस्त है। महासचिव ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के चार सम्मानित जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके जिन समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाया, जमाअत महसूस करती है कि यह देश के लिए ध्यान देने योग्य है और अदलिया के लिए भी आवश्यक है कि वह लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए राजनीतिक वर्गों से पूरी तरह स्वतंत्र रहें। विपक्ष की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के खिलाफ महाभियोग इस बात का संकेत है कि सीजेआई के प्रति विश्वास में कमी पायी जाती है। सिविल सोसायटी को चाहिए कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका की जरूरत का समर्थन और मांग करें। उन्होंने कहा कि जजों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया है उस पर हकूमत की जानिब से रुकावट डालने का प्रयास चिंता का कारण है। न्याय के बारे में कहा जाता है कि इंसाफ न केवल किया किया जाना चाहिए, बल्कि इंसाफ होता दिखाई भी देना चाहिए और साथ ही इंसाफ में देरी, इंसाफ से इकार है। जमाअत महसूस करती है कि देश की अदलिया इन दिनों दोराहे पर है और सभी न्यायप्रिय लोगों से अपील करती है कि वह अपने खास हितों से उपर उठें और सरकार से मांग करती है कि इससे पहले कि अवाम का इस पर से भरोसा उठ जाए हिन्दुस्तान के न्यायव्यवस्था के सुधार की कोशिश करे। न्यायपालिका लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है और इसके कमजोर पड़ने से तानाशाही मजबूत होगी।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हालिया विवाद के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि यह सांप्रदायिकता के आधार पर समाज के ध्रुवीकरण का प्रयास है। वे चाहते हैं कि देश के मुख्य समस्याओं से अवाम का ध्यान हटाकर सरकार की नाकामी पर पर्दा डाला जाए। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जमाअत के समर्थन के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में महासचिव ने कहा कि जमाअत मुत्तहदा मुस्लिम महाज़ का एक हिस्सा है चुनाव-क्षेत्र के उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है जिसका जमाअत समर्थन करेगी। जमाअत का हमेशा से यह स्टैंड रहा है कि वह सेक्युलर और साफ-सुथरी छवि वाले और सांप्रदायिक दलों को हराने वाले उम्मीदवारों का समर्थन करती आयी है। गुड़गावों में असमाजिक तत्वों द्वारा नमाज में रुकावट डालने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में महासचिव ने कहा कि इस समस्या को पुुलिस प्रशासन की मदद से स्थानीय स्तर पर हल का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नमाज़ियों को उत्तेजित करने के प्रयास के दौरान मुसलमानों ने जिस धैर्य का परिचय दिया वह प्रशंसनीय है।

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