Thursday, December 13, 2018
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महाकवि गोपालदास नीरज के गीतों का कारवां सदा के लिए थम गया

लाल बिहारी लाल

हिंदी के महाकवि गोपालदास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को उ.प्र.के इटावा जिला केपुरावरी गांव में हुआ था। इनका बचपन काफी मुफलिसी में बिता । शुरु में गंगा मैयामें चढ़ाये जाने वाले 5 या 10 पैसे को नदी से एकत्र कर जीवन यापन होता था। इसमुफलिसी ने उन्हें गीतकार बना दिया। धीरे धीरे इनकी रचनाये विभिन्न मंचो परवाहवाही लूटने लगी। इनकी रचनाये जनमानस को सीधे छू जाती थी। जो आज भी इनकी रचनायें कालजयी है।

गोपालदास “नीरज” कुछ फिल्मों के लिए भीगीत लिखा जो अपने जमाने में काफी लोकप्रिय हुए औऱ आज भी हिंदी प्रेमी के मनमषतिष्क पर दर्ज है।

वो हम न थे,वो तुम नथे/ शोखियों में घोला जाये पूलो का शबाब/ स्वप्न झरे फूल से,गीत चुभे शूल से/ लिखेजो खत तुझे/ ऐ भाई जरा देख के चलो/दिल आज शायर है/जीवन की बगिया महकेगी/मेघा छायेआधी रात/खिलते हैं गुल यहाँ/फूलो के रंग से/रंगिला रे तेरे रंग में/ मेरो सैंया/रादा ने माला जपी श्याम की/देखती ही रहो आज तुम दरपन/गुलाबी फूल रेशमी उजालाहै/मखमली अंधेरा काल का/कहता है जोकर सारा जमाना/आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ आदि।

उन्हें फिल्मो के लिए लगातारतीन साल फिल्म फेयर एवार्डमिला। सन 1970 में गीत –काल का पहिया घूमे रे भइया, फिल्म चंदा औरबिजली, 1971 में बस यही अपराध मैं हर बारकरता हूं, फिल्म पहचान के लिए तथा 1972 में गीत-ए भाई जरा देख के चलो फिल्म मेरानाम जोकर के लिए।

इन्होने कुछ मुक्तक तो कुछ हाइकू भी लिखा एक हाइकू- जन्म मरण,समय के गति के,हैं दो चरण । इनकी कुछ रचनाये बच्चो पर भी है – हम बच्चे हैं तोक्या? कुछ विद्वानो ने इनके बारे में अलग अलग विचार दिये हैं- कोई इन्हेंअश्वघोष कहा तो कोई इन्हें संत फकीर वही दिनकर जी ने इन्हें हिंदी के वीणा मानतेथे।

इनकी प्रकाशित कुछ पुस्तकों में कालानुसार-

संघर्ष(1944),अन्तर्ध्वनि(1946),विभावरी(1948),प्राणगीत(1951),दर्द दियाहै(1956),बादरबरसगयो(1957),मुक्तकी(1958),दोगीत(1958),नीरजकीपाती(1958),गीतभीअगीतभी(1959),आसावरी(1963),नदीकिनारे(1963),लहरपुकारे(1963),कारवाँगुजरगया(1964),फिरदीपजलेगा(1970),तुम्हारेलिये(1972),नीरजकीगीतिकाएँ(1987) आदि।

नीरजजीकोअबतककईपुरस्कारवसम्मानप्राप्तहोचुकेहैं,जिनमें –विश्व उर्दू परिषद्पुरस्कार,पद्मश्रीसम्मान(1991),भारतसरकार,यशभारती एंव एक लाख रुपयेकापुरस्कार(1994),उत्तरप्रदेशहिन्दीसंस्थान,लखनऊ द्वारा पद्धम भूषण

सम्मान (2007),भारतसरकार द्वारा।

19 जुलाई 2018 को फेफड़े में संक्रमn के कारण इस वीणा के तार की झंकारसदा सदा के लिए खामोश हो गया।

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