Thursday, December 13, 2018
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देश में ही डाटा संरक्षण करना एक अच्छा कदम किन्तु अंतर करने की आवश्यकता

संवाददाता(दिल्ली)डाटा लोकलाईजेशन के गंभीर वित्तीय मुद्दे जिसमें रिज़र्व बैंक ऑफ़इंडिया ने सभी कंपनियों, बैंकों एवं अन्य संस्थानों को आदेश दिया है कीवो भारत में से प्राप्त किसी भी प्रकार के डाटा को देश में ही रखें, कोलेकर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर इस मामले में उनके हस्तक्षेप का आग्रहकरते हुए कहा है की जिन कंपनियों एवं संस्थानों के पास नागरिकों कापूरा विवरण है उनमें और अन्य कंपनियों जिनके पास केवल आंशिकविवरण है के बीच अंतर रखना चाहिए तभी सही अर्थों में यह योजनाफलीभूत होगी !

कैट ने सरकार और रिज़र्व बैंक के इस कदम की सराहना कर समर्थनदेते हुए कहा की इस कदम से डाटा संरक्षण का ढांचा मजबूत होगा औरभारतीय नागरिकों के डाटा के गलत इस्तेमाल की संभावनाएं भी न केबराबर होंगी तथा साथ ही भारत एक डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप मेंमजबूत से उभरेगा !

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र की प्रति कैट ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर, वित्त मंत्रीश्री अरुण जेटली, आई टी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद, भाजपा अध्यक्ष श्रीअमित शाह सहित अन्य लोगों को भी भेजी है !

 नई दिल्ली में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में कैट के राष्ट्रीयमहामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की प्रधानमंत्री को लिखे पत्र मेंकहा गया है की बड़ी मात्रा में विभिन्न प्रकार की कंपनियां, बैंक एवं अन्यसंस्थान अनेक कारणों से भारतीय नागरिकों से डाटा एकत्र करते हैंलिहाजा उनके बीच स्पष्ट अंतर रखने की आवश्यकता है जिससे इसकेविपरीत परिणाम न हो ! अर्थव्यवस्था के बृहद हित में सभी को एकसमान नहीं रखा जा सकता है ! इस दृष्टि से इन कंपनियों अथवासंस्थानों के बीच एक अंतर रखने की आवश्यकता है !

उन्होंने कहा की डिजिटल प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, गूगल, अमेज़न तथाबैंक जिनके पास लोगों का पूरा डाटा जिसमें नाम, पता, फोन नंबर,संपर्क विवरण आदि शामिल है रहता है जो इन कंपनियों द्वारा अपनीसेवाएं देने के दौरान इस्तेमाल किया जाता है , ऐसा डाटा निश्चित रूप सेदेश में ही संरक्षित होना जरूरी है जिससे इसका दुरूपयोग न हो सके !

दूसरी ओर वीसा, रूपए, मास्टरकार्ड जैसी केवल  टेक्नोलॉजी देने वालीकंपनियां है जिनके पास केवल 16 अंकों का डिजिटल कार्ड नंबर होताहै जिससे किसी भी व्यक्ति को चिन्हित करने अथवा उसका कोई डाटानहीं होता , ऐसी कंपनियों को डाटा भारत में रखने के लिए बाध्य नहींकरना चाहिए क्योंकि इसका विपरीत असर अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन औरव्यापार पर पड़ सकता है ! केवल मात्र 16 अंकों के डिजिटल नंबर कोसंरक्षित करने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि इन कंपनियों के कार्डका पूरा डाटा केवल बैंकों के पास ही रहता है !

 खंडेलवाल ने कहा की गत 5 वर्षों से अधिक समय से कैट देश मेंडिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर अनेकअभियान चला रहा है जिसके सकारात्मक परिणाम भी आये हैं और गतवर्षों के मुकाबले अब देश भर में बड़ी संख्यां में व्यापारी और उपभोक्ताडिजिटल भुगतान का उओयोग कर रहे हैं ऐसे में इन कंपनियों के डाटाको देश में संरक्षित करने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले फ्रॉड औरपेमेंट सिक्योरिटी सिस्टम से लोगों को वंचित होना पड़ेगा

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