Monday, November 19, 2018
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पहली महिला प्रधानमंत्री औऱ आयरन लेडी- इंदिरा गांधी

लाल बिहारी लाल
आयरन लेडी इंदिरा गांधी का जन्म देश के एक आर्थिक एंव बौद्धिक रुप से सभ्रांत परिवार में पं. जवाहरलाल नेहरु के घऱ में 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद के आनंद भवन में हुआ था। इनके माता का नाम कमला नेहरु तथा दादा का नाम पं. मोती लाल नेहरु था। इनके दादा एंव पिता दोनों वकालत करते थे।बचपन में इनके माता पिता का लार-दुलार ज्यादा नहीं मिला क्योंकि पिता भारतीय राजनीति में व्यस्त थे वही माता अस्वस्थ्य रहती थी। इन्हें दादा से ज्यादा लार-दुलार मिला क्योंकि यह घर की इकलौती संतान थी। इनके दादा इन्हें लक्ष्मी एवं दूर्गा के प्रतीक मानते थे।

इंदिरा की प्ररंभिक शिक्षा आनंद निवास पर ही हुई ।इन्होनें सिर्फ अंग्रैजी में दक्षता हासिल की और अन्य विषयों पर ध्यान कम दिया। फिर शांति निकेतन उसके बाद उच्च शिक्षा हेतु इंगलैंड गई वैडमिंटन स्कूल तथाआक्सपोर्ड विश्वविद्याल में अध्यन किया फिर ये भारत आ गई । उन्हें विश्वभर के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। प्रभावशाली शैक्षिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा विशेष योग्यता प्रमाण दिया गया। श्रीमती इंदिरा गांधी शुरू से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं। बचपन में उन्होंने ‘बाल चरखा संघ’ की स्थापना की और असहयोग आंदोलन के दौरान कांग्रेस पार्टी की सहायता के लिए1930 में बच्चों के सहयोग से ‘वानर सेना’ का निर्माण किया।

लंदन में अध्ययन के दौरान ही इनकी मुलाकात फिरोज गांधी से हुई थी। उन्होंने 26 मार्च 1942 को फ़िरोज़ गाँधी से विवाह किया। उनके दो पुत्र थे। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय सहभागिता के लिए सितम्बर 1942 में उन्हें जेल में डाल दिया गया। 1947 में इन्होंने गाँधी जी के मार्गदर्शन में दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य किया। 1955 में श्रीमती इंदिरा गाँधी कांग्रेस कार्य समिति और केंद्रीय चुनाव समिति कीसदस्य बनी।1958 में उन्हें कांग्रेस के केंद्रीय संसदीयबोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया।वे एआईसीसी के राष्ट्रीय एकता परिषदकी उपाध्यक्ष और 1956 में अखिल भारतीय युवा कांग्रेस और एआईसीसी महिला विभाग की अध्यक्ष बनीं।वे वर्ष 1959 से 1960 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं। स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु को उनके कामों में हाथ बटाने लगी।1962 में चीन हमले के कारण नेहरु जी को शॉक लगा और इसी के करण चिंताग्रस्त रहने लगे औऱ अंततः 27 मई 964 को नेहरु जी का निधन हो गया। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने और उन्हीं की प्रेरणा से चुनाव लड़ी औऱ जीतने के बाद शास्त्री मंत्रीमंडल में सूचना एंव प्रसारण मंत्री बनी।इस समय रेडियों का जमाना था।इसने इसमें काफी परिवर्तन किया और इसे मनोरंजक बनाया तथा यही रेडियो भारतीयों में युद्द के दौरानराष्ट्रीयता का बीज रोपने में सहायक सिद्द हुआ। वह 1964-1966 तक सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं । इंदिरा हरित क्रांति की अगुआ बनी औऱ देश को खाद्यान उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाई। पंचवर्षीय योजनाओं से गरीबी उन्मुलन पर बल दी। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के मुद्दे पर दक्षिण और गैर हिंदी राज्यों में दंगा छिड़ने पर चेन्नई गई औऱ स्थिति को शांत की। 1965 में भारत पाक युद्द के समय सेना द्वारा मना करने के बावजूद इंदिरा सेना का मनोबल बढ़ाने केलिए सीमावर्ती क्षेत्र श्रीनगर गई। सोवियत संघ के मध्यस्थता के बाद ताशकंद में भारत-पाक समझौता हुआ जिसमें भारत की ओऱ से तत्कालिन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तथा पाकिस्तान की ओर से अयूब खान ने हस्ताक्षर किये। इस समझौते पर ह्स्ताक्षर के कुछ घंटे बाद ही शास्त्री जी का निधन हो गया।

शास्त्री जी के निधन के बाद तत्कालिन कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के.कामराज नेइंदिरा को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाया। इस कदम से कांग्रेस में मोरारजी देसाई सहित कई नेता नराज हो गये। फिर इंदिरा ने सरकार के मुख्य पदों से कई को हटाकर अपने चहेतों को पदास्थापित किया। 1967 में चुनाव में मनमुताबिक सफलता नही मिली जिससें वो समाजवादी एवं सामयदलों के सहयोग से सरकार चलाई पर मोरारजी से मतभेद बढने के कारण 1969 मेंभारतीय कांग्रेस (आई) की स्थापना की। बतौर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का पहलाकार्यकाल 1966 से 1971 तक रहा। भारत की अर्थब्यवस्था को पंख लगाने के लिए 1969 में 14 बैंको का राष्ट्रीयकरण किया। इसी बीच भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 की जंग पूरी दुनिया ने देखी। 30 जनवरी,1971 को आतंकवादी इंडियन एयरलाइंस के एक विमान को हाइजैक कर लाहौर ले गए और इसे तहस-नहस कर दिया था।उस वक्त इंदिरा गांधी ने भारत से होकर आने-जाने वाली पाकिस्तान की सभी फ्लाइट्स के उड़ान पर प्रतिवंध लगा दिया । इसका यह फायदा हुआ कि अक्टूबर-नवंबर में जब संकट चरम पर था तो पाकिस्तान अपनी सेनाएं पूर्वी बंगाल में पहुंचाने में नाकाम रहा। इंदिरा ने सेनाध्यक्ष से राय मशविरा की तो सेनाअध्यक्ष ने जंग में कुदने से मना कर दिया पर सेनाध्यक्ष को मनायी। अंततः सेनाअध्यक्ष मानेकशा मान गये पर कहा कि हमें आजादी चाहिये। इंदिरा ने हां कर दी औऱ परिणाम सारी दुनिया जानता है कि एक अलग राष्ट्रबंगला देश का उदय हुआ।

फिर आंतरिक सुरक्षा के मामने में सोवियतसंघ से 20 साल की संधि कर देश को विकास के राह पर ले गई औऱ 1974 में भारत चीन और पाकिस्तान से सामरिक सुरक्षा के मद्दे नजर पोखरन में परमाणु परीक्षण कर यह जता दिया कि भारत भी किसी से कम नहीं है। जनवरी 1978 में उन्होंने फिर से कांग्रेस का अध्यक्ष पद ग्रहण किया। इंदिरा कड़े मिजाज की थीं और उनके फैसले में आक्रामकता की झलक दिखती थी। 1980 में पुनःप्रधानमंत्री बनी और फिर से 6 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। इंदिरा ने देशहितमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए औऱ इसी के करण इन्हें जन मानस मे लोग आयरन लेडी( लौहमहिला) कहा जाने लगा। स्वर्ण मंदिर परिसर में सेना भेजकर आतंकवादियो का सफाया कर दिया जिससे सिख कौम नराज हो गया और अंत में इनके सिख कौंम के अंग रक्षक ही 31अक्टूबर 1984 को गोली मार कर इनकी निर्मम हत्या कर दी। ऐसे महान महिला भारत में बहुत कम ही जन्म लेती है।

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