Wednesday, November 21, 2018
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पूर्वी दिल्ली में सीड्स सुरक्षा सप्ताह के माध्यम से ’अब तैयार रहें’ अभियान

संवाददाता (दिल्ली) आपदाओं तथा आपदाओं के प्रबंधन के अभिनव तरीकों के बारे में जागरूकता कायम करने के उद्देश्य से हर साल 13 अक्तूबर को इंटरनेशनल डे फाॅर डिसास्टर रिडक्षन मनाया जाता है। अक्तूबर को आपदाओं की तैयारी के महीने के रूप में मनाते हुए सीड्स (सस्टेनेबल एनवायरनमेंट एंड इकोलॉजिकल डेवलपमेंट सोसाइटी) 22 से 28 अक्टूबर के बीच सुरक्षा सप्ताह मना रहा है जिसका उद्देश्य सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस दौरान अनेक इंटरैक्टिव गतिविधियों का आयोजन किया गया ताकि लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से अलग अभिनव तरीकों को बढ़ावा दिया जाए। इन गतिविधियों में फ्लैश मॉब्स, नुक्कड़ नाटक एवं जागरूकता कार्यशालाएं शामिल हैं।
’अब तैयार रहें’ अभियान के लिए लोगों को आपातकालीन हेल्पलाइन नम्बरों को याद रखना जरूरी है जो खास आपदाओं के मौके पर हर दिन चौबीसों घंटे काम करती हैं। आपदाओं के समय पहले के कुछ मिनट बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं और लोग अक्सर भूल जाते हैं कि आपदाओं के दौरान मदद के लिए कौन से नम्बर डायल करने चाहिए। साथ ही साथ लोगों को अपने ‘‘गो रेडी’’ बैग को भी तैयार रखने की जरूरत होती है। आपदाओं के समय सुरक्षित रहने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक तरीका पहले से ही आपातकालीन सुरक्षा किट को तैयार रखना है। ‘गो बैग’’ में सभी आवश्यक सामग्रियां होती हैं और यह आपदा तैयारी का एक बेहतरीन तरीका है। इसमें प्राथमिक चिकित्सा के समान, हाइजीन वस्तुएं, महत्वपूर्ण दस्तावेज, ड्राई फ्रूटस और कुछ जरूरी उपकरण होते हैं।
इन पहलुओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के इरादे से, पूर्वी दिल्ली में लक्ष्मी नगर और निर्माण विहार में मेट्रो स्टेशनों पर सोमवार, 22 अक्तूबर से ही फ्लैष मॉब्स का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत अभियान की टीम मेट्रो स्टेशनों के पास लोगों का ध्यान आकर्शित करने के लिए संगीत के साथ छोटा सा नाटक करती है।
इसी तरह, पूर्वी दिल्ली में वेस्ट विनोद नगर, कल्याणपुरी और त्रिलोकपुरी में महत्वपूर्ण जगहों पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र में आठ समुदाओं के बीच जागरूकता कायम की गई।
केवल चार दिनों के भीतर फ्लैश माॅब्स एवं नुक्कड़ नाटकों जैसे आयोजनों की मदद से पूर्वी दिल्ली में तीन हजार से अधिक लोगों को जागरूक बनाया गया। भारत में आपदाओं के व्यापक प्रभाव तथा स्थितियों को और गंभीर बनाने वाले जोखिमों को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि लोगों को जागरूक बनाया जाए तथा उन्हें तैयार रहने को प्रेरित किया जाए।

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