Wednesday, November 21, 2018
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वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव से अपने आप को कैसे बचाए

डाॅ ज्ञानेन्द्र अग्रवाल
सीनियर कन्सलटेन्ट
पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन
जेपी हाॅस्पिटल, नोएडा

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार हमारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली दुनिया के अति प्रदूषित शहरों में से एक है। पिछले कुछ सालों से शहर में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और हवा की गुणवत्ता की दृष्टि से शहर बीजिंग (चीन), अल जुबैल (सउदी अरब) और कायरो (इजिप्ट) के करीब पहुंच गया है। वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक धुएं के अलावा कन्सट्रक्शन साईट्स से उठने वाली धूल आज दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का मुख्य कारण बन चुकी है।

वायु प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं

वायु प्रदूषण बेहद घातक होने के कारण कई तरह की बीमारियों और यहां तक अपंगता का कारण भी बन सकता है। यह ब्रोंकोस्पाज़्म, साइनुसाइटिस, सांस की बीमारियों का कारण बन सकता है। सांस के साथ अधिक मात्रा में कार्बन के शरीर में जाने से व्यक्ति थकान महसूस करने लगता है। दिल्ली-एनसीआर और इसके आस-पास रहने वाले अस्थमा के मरीज़ों पर खासतौर से इसका बुरा असर पड़ता है और इन्हें घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। यहां तक कि स्वस्थ लोगों में भी प्रदूषण के कारण सांस की परेशानी, सूखी खांसी, त्वचा की समस्याएं और आंखों में खुश्की आदि जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अपने आप को प्रदूषण से कैसे बचाएं

यहां हम आपके लिए कुछ सुझाव लेकर आए हैं, जिनके द्वारा आप अपने आप को वायु प्रदूषण के घातक प्रभावों से कुछ हद तक बच सकते हैं।
हवा साफ करने वाले पौधे लगाएंः घर की भीतरी हवा को साफ करने के लिए आप प्राकृतिक एयर-प्यूरीफाइंग पौधे लगा सकते हैं जैसे मनी प्लांट, एलो वेरा और स्पाइडर प्लांट। ये सभी पौधे अपने आस-पास की हवा को साफ करते हैं। घर में कैमिकल फ्रैशनर या क्लीनर का इस्तेमाल न करें, इसके अलावा बंद कमरे में मोमबत्ती या ऐसी चीज़ न जलाएं जिससे धुंआ पैदा होता हो।

वेंटीलेशनः घर की खिड़कियों को खोलें ताकि हवा का सुगम संचार होता रहे, वेंटीलेशन से घर में प्रदूषण के स्तर को कम रखा जा सकता है। इससे घर में ताज़ी हवा आती रहती है।

एसी के फिल्टर को साफ करेंः एसी के फिल्टर को नियमित रूप से साफ़ करें ताकि कमरे में आने वाले हवा में धूल न हो। इन फिल्टर्स को समय≤ पर बदलना भी चाहिए।

मास्क पहनेंः जिन क्षेत्रों में धूल ज़्यादा उड़ती हो, या आंधी-तूफ़ान का प्रभाव हो, वहां मास्क पहनें। एक अच्छे मास्क में कार्बन फिल्टर और एक्ज़हास्ट वाॅल्व होना अति आवश्यक है। मास्क ऐसा हो जो चेहरे पर अच्छी तरह फिट हो जाए, और व्यक्ति लंबे समय तक भी इसे आराम से पहन सके। ध्यान दें कि मास्क और चेहरे के बीच में कोई गैप न हो।

एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करेंः एयर प्यूरीफायर कमरे की भीतरी हवा को साफ़ करता है और प्रदूषण के स्तर करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अच्छे एयर प्यूरीफायर कमरे में हवा की गुणवत्ता को सुरक्षित स्तर पर नियंत्रित करते हैं।

कार के भीतर खास ध्यान देंः कार की भीतरी हवा चार से पांच गुना ज़्यादा प्रदूषित हो सकती है। कार में बैठने से पहले कुछ देर के लिए खिड़कियां खोल दें ताकि ताज़ी हवा भीतर आ जाए। अपनी कार के एसी को इन्डोर मोड में रखें।

भारी-भरकम व्यायाम न करेंः जहां तक हो सके मुश्किल व्यायाम न करें, घर के बाहर कम से कम जाएं, सुबह के समय बाहर साइक्लिंग जाॅगिंग करने के बजाए भीतर रहकर जिम करें। बच्चों का खास ध्यान रखें कि वे घर से बाहर कम रहें।

आहारः विटामिन सी, मैग्निशियम और ओमेगा फैटी एसिड से युक्त फलों का सेवन करें। ये फल शरीर की प्रतिरक्षी क्षमता को मजबूत बनाते हैं और प्रदूषण एवं बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

खूब पानी पीएंः पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर साफ हो जाता है। नियमित चाय के बजाए ग्रीन टी, हर्बल टी और तुलसी से युक्त चाय का सेवन करें। इससे शरीर के टाॅक्सिन्स निकल जाते हैं।

अपने आप को सुरक्षित रखेंः आॅटो रिक्शा के बजाए मेट्रो, बस या कार पूल का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये बंद होती हैं, इनमें प्रदूषण कम होता है। आंखों को सुरक्षित रखने के लिए चश्मा पहनें और अपने चेहरे को स्कार्फ से ढक लें। घर आने के बाद अपना गला और आंखें साफ करें। कन्स्ट्रक्शन साईट या ऐसी सड़कों पर ना जाएं जहां टैªफिक ज़्यादा रहता है। अगर सांस लेने में परेशानी, खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डाॅक्टर की सलाह लें।

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