Monday, December 10, 2018
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मेदांता ने टीबी मुक्त भारत के लिए प्रतिबद्धता मजबूत की

संवाददाता (दिल्ली) मेदांता : द मेडिसिटी ने इंटरनेशन यूनियन अगेनस्ट कोलैबोरेशन विद दि इंटरनेशनल यूनियन अगेनस्ट ट्यूबरकोलोसिस एंड लंग डिजीज ;दि यूनियन और भारत सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीवी डिविजन के साथ मिलकर दिन भर के एक कांफ्रेंस का आयोजन किया। यह टीबी मुक्त भारत के लिए कार्रवाई की अपील के रूप में था। इस कार्यक्रम में डीडीजीए सीटीडी (डिप्टी डायरेक्टर जनरल, सेंट्रल टीबी डिविजन), डीएचएस (डायरेक्टर हेल्थ सर्विस टीबी) हरियाणा समेत सरकार के प्रतिनिधियों और यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) आदि ने हिस्सा लिया। सम्मेलन ने भारत में टीबी के डायगनोसिस (रोगनिदान/बीमारी) की पहचान के क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों को दूर किया गया और इस मुद्दे पर कॉरपोरेट प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसके अलावाए 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए टेक्नालॉजी को बेहतर करने की आवश्यकता भी बताई गई।

भारत में टीबी के ऐसे मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है जिनकी अभी पहचान नहीं हुई है। सौभाग्य से टेक्नालॉजी बेहतर हो रही है जिससे स्क्रीनिंग और बीमारी का पता लगाना आसान होगा तथा इसमें तेजी आएगी। जिनीएक्सपर्टएज को सीबी-एनएएटी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक पोर्टेबल, उपयोग में आसान सिस्टम है जिसका विकास खासतौर से उनलोगों के लिए किया गया है जिनके पास पहुंचना मुश्किल है और बीमारी की पहचान प्वाइंट ऑफ केयर पर हो इस बात को माना जाए। इससे सही, द्रुत, और किफायती टेस्ट परिणाम संभव हैं। इसके अलावाए इससे ड्रग रेसिसटेंस का पता चल सकता है (दोनों तरह की जगहों पर जहां कम लोग आते हैं और जहां ज्यादा लोग आते हैं)।

दि यूनियन के डॉ. जेमी टोनसिंग ने कहा”औसतन टीबी की पहचान करने में डेड़ महीने लग जाते हैं। मुख्य रूप से इसलिए कि बहुत कम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे मशीन ठीक हैं और टीबी के सिर्फ आधे मामलों की पहचान आम स्पूटम टेस्ट से होती है। बाकी आधे मरीज (मरीज जिनकी बीमारी पहचानी नहीं जाती) दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं और संक्रमण के शिकार होने के कारण मर भी सकते हैं। हम उन्नत तकनीकी सहायता और टीबी मुक्त भारत मिशन की दिशा में एक और आकर्षक बदलाव मुहैया कराते हुए खुश है। यह मोबाइल एक्स-रे वैन में जिनीएक्सपर्टएज के जरिए किया जाना है। सरकार और मेदान्ता की इस पहल को अगर कॉरपोरेट्स समर्थन दें तो टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करना वास्तविकता बन सकता है।”

मेदांता – द मेडीसिटी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा,टीबी एक बेहद गंभीर बीमारी है जो भारत की तमाम विशेषताओं को खत्म कर रही है। इस समय पलमिनरी टीबी के 50 %से ज्यादा मरीजों का पता नहीं चल पाता है। टीबी की औषधि रोधी प्रजातियों के विकास से स्थिति और खराब हो गई है। सामाजिक कलंकए जागरूकता की कमी और अपर्याप्त चिकित्सा सुविधा समस्या को और गंभीर करते हैं। जन स्वास्थ्य और खासतौर से टीबी मुक्त भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए हमलोगों ने एक अनूठी प्रणालीए जिनीएक्सपर्टएज पेश की है। यह पोर्टेबल है और बीमारी की पहचान कम समय में सही करता है। इससे हर रोज काम की गति बढ़ेगी और काम बड़े पैमाने पर किया जा सकेंगा। मिशन टीबी मुक्त हरियाणा की सफलता के बाद इस मिशन का विस्तार दूसरे राज्यों में होगा और इसकी शुरुआत झारखंड में टीबी मुक्त रांची से होगी।”

 

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