Tuesday, April 23, 2019
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नफरत और प्यार की कहानी “कलंक”

मानव
अगर आप पीरियड ड्रामा, मल्टीस्टार कास्ट,माधुरी का डांस,वरुण-आलिया की केमिस्ट्री के दीवाने हैं तो कलंक जरूर देखें | कलंक नफरत और प्यार के  बीच की एक कहानी है जहाँ नफरत प्यार पर हावी दिखी |
फिल्म का मुख्य आकर्षण उसके संवाद है | संजय दत्त और माधुरी के बीच का दृश्य और उसके संवाद दर्शकों को याद रहेंगे | वरुण धवन और आलिया भट्ट फिल्म में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे या यूँ कहे की सारी कहानी उन दोनों पर ही निर्भर थी | आदित्य रॉय कपूर और सोनाक्षी सिन्हा ने अपने रोल के प्रति पूरा न्याय किया | कुणाल खेमू ने नकरात्मक भूमिका निभाई पर फिल्म में इतने सारे कलाकार होने के बावजूद उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया |
 कहानी
कहानी 1940 के दशक में हुसैनाबाद में बेस्ड है, जहां रूप (आलिया भट्ट) की दुनिया उस वक्त अचानक बदल जाती है, जब वह अपनी बहनों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अखबारनवीस देव चौधरी (आदित्य रॉय कपूर) से शादी करने को राजी हो जाती है।
कैंसरग्रस्त सत्या (सोनाक्षी सिन्हा) मरने से पहले अपनी आखिरी ख्वाहिश के तहत वह अपने पति देव को अपनी जगह पत्नी के रूप में एक साथी देकर जाना चाहती है, मगर सुहागरात को देव रूप से कहता है कि इस रिश्ते में उसे इज्जत तो मिलेगी, मगर प्यार नहीं, क्योंकि प्यार वह सिर्फ अपनी पहली पत्नी सत्या से करता है। रूप बहार बेगम (माधुरी दीक्षित) के कोठे पर गाना सीखने जाती है, जहां उसकी मुलाकात हीरामंडी नामक मोहल्ले में लोहार के रूप में काम करनेवाले जफर (वरुण धवन) से होती। दिलफेंक जफर रूप से नजदीकियां बढ़ाकर प्यार की दुनिया रच देता है, मगर वह रूप से यह बात साफ-साफ छिपा जाता है कि वह बहार बेगम और देव चौधरी के पिता बलवंत चौधरी की नाजायज औलाद है। कहानी में देश के बंटवारे का एक पैरलल ट्रैक भी चल रहा है। प्री क्लाइमैक्स तक आते-आते देव जान जाता है कि उसका सौतेला नाजायज भाई जफर ही उसकी पत्नी रूप का प्रेमी है, मगर तब तक तरक्की पसंद देव के खिलाफ अब्दुल (कुणाल खेमू) दंगों का खूनी खेल शुरू कर चुका होता है।
क्यों देखें
वरुण,आलिया के अभिनय, भव्य और खूबसूरत सेट्स और कॉस्ट्यूम,संगीत के लिए फिल्म देखी जा सकती है।
क्यों न देखें
 फिल्म का फर्स्ट हाफ बहुत ही धीमा है। निर्देशक अभिषेक वर्मन ने बंटवारे से पहले के माहौल में किरदारों को स्थापित करने में बहुत ज्यादा वक्त लगाया है। स्क्रीनप्ले बहुत ही कमजोर है, जो कहानी को बोझिल कर देता है।

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