Monday, May 27, 2019
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बढ़ते डिजिटल लेनदेन के साथ, भारत में वित्तीय साइबर अपराध और पहचान की चोरी बढ़ रही है – एफआईएस पेस रिपोर्ट का खुलासा

संवाददाता (दिल्ली) वित्तीय सेवा प्रौद्योगिकी में वैश्विक अगुवा एफआईएसन्न् (एनवाईएसईः एफआईएस) की ओर से जारी नए शोध में पाया गया कि वित्तीय धोखाधड़ी में पिछले वर्ष के साथ काफी वृद्धि हुई है, जिसमें पीड़ितों की संख्या दोगुनी होकर 37 प्रतिशत हो गई है और सभी आयु वर्ग के लोग धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं। अन्य आयु समूहों की तुलना में 27 से 37 वर्ष का आयु समूह वित्तीय धोखाधड़ी से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
एफआईएस की पांचवीं वार्षिक पेस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीयों ने डिजिटल लेन-देन को स्वीकार कर लिया है, लेकिन अभी भी उन्हें व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए क्या करना है और क्या नहीं करना है, को सीखना बाकी है क्योंकि सोशल इंजीनियरिंग और फिशिंग ईमेल बड़े पैमाने पर हो रही है।

भारत में मोबाइल एप्स को तेजी से अपनाने, डिजिटल भुगतान और वित्तीय धोखाधड़ी की बढ़ती दर के बीच नाटकीय संबंध है। पिछले वर्ष के दौरान वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 96 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ताओं ने नकद भुगतान से हटकर मोबाइल ऐप और डिजिटल भुगतान पर स्विच किया, नकद से डिजिटल भुगतान पर आने का चलन वित्तीय एकीकरण की दिशा में देश के प्रयासों के चलते भी हुआ।

एफआईएस, भारत के प्रबंध निदेशक रामास्वामी वेंकटचलम ने कहा, ‘वर्तमान डिजिटल बैंकिंग परिदृश्य में, यह जरूरी है कि बैंक सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और ग्राहक शिक्षा में निवेश बढ़ाएं। महत्वपूर्ण रूप से, यह भी भरोसेमंदता को बढ़ा सकता है, जो वर्तमान में बैंकिंग करते समय उपभोक्ताओं की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ग्राहकों का अपने बैंकों पर भरोसा सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि कई उम्मीदों के आधार पर एक उद्देश्यपूर्ण निर्णय है। हालांकि, बैंक ग्राहकों के विश्वास को अर्जित कर सकते हैं यदि वे सुरक्षित और सुरक्षित लेनदेन, धोखाधड़ी की रोकथाम और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता पर ध्यान केंद्रित करते हैं।’

 

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