Tuesday, April 23, 2019
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राहुल गाँधी द्वारा चोर व्यापारी कहने पर कैट ने की कड़ी निंदा

संवाददाता (दिल्ली) देश के दो प्रमुख दलों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने आगामी चुनावों के सन्दर्भ में अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी कर दिया है 1 व्यापारियों के मुद्दों की दृष्टि से कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने दोनों घोषणापत्रों का तुलनात्मक अध्ययन किया है ! इस बार के चुनावों में देश के 7 करोड़ व्यापारियों को एक वोट बैंक के रूप में एकतरफा मतदान कराने एवं व्यापारियों की भूमिका को निर्णायक बनाने के लिए कैट के पिछले तीन महीने से देश भर में एक राष्ट्रीय अभियान छेड़ा हुआ है ! कैट ने कहा है की कांग्रेस के घोषणा पत्र की तुलना में भाजपा का घोषणा पत्र व्यापारी मुद्दों को लेकर बहुत आगे निकल गया है ! कैट ने सभी दलों को अपना एक राष्ट्रीय चार्टर भेजा है जिस पर अन्य दलों का घोषणा पत्र आने के बाद कैट यह निर्णय करेगा की इस बार के चुनावों में देश भर के व्यापारी किस दल का समर्थन करेंगे और किसे अपना वोट देंगे !

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने 3 अप्रैल को श्री राहुल गाँधी द्वारा उस बयान की कड़ी निंदा की है जिसमें उन्होंने कहा की कांग्रेस की न्याय योजना के लिए वो धन ” चोर व्यापारियों ” से वसूलेंगे ! श्री खंडेलवाल ने कहा की व्यापारी वर्ग को चोर कह कर श्री गाँधी ने देश के व्यापारियों का बड़ा अपमान किया है जिससे देश भर के व्यापारी श्री राहुल गाँधी और कांग्रेस से बहुत नाराज़ है ! व्यापारियों के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल आज तक किसी भी राजनेता ने नहीं किया लेकिन जिन शब्दों का इस्तेमाल श्री गाँधी ने किये है वो बेहद निंदनीय है और आने वाले चुनावों में कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है !
खंडेलवाल ने भाजपा और कांग्रेस के घोषणापत्रों का व्यापारिक मुद्दों को लेकर किये गए तुलनात्मक अध्ययन का जिक्र करते हुए कहा की जहाँ भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में व्यापारियों के अहम् मुद्दों को लागू करने का संकल्प लिया है वहीँ दूसरी ओर कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में व्यापारियों को केवल तीन मुद्दों तक ही सीमित रखा गया है और वो भी अर्थहीन एवं तर्कहीन है जो पूरे नहीं हो सकते है !
उन्होंने कहा की कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कहा की जीएसटी के वर्तमान स्वरुप को बदल कर नया जीएसटी कानून लाएगी जिसमें सभी वस्तुओं पर कर की दर एक समान होगी ! कांग्रेस ने यह भी कहा की ई वे बिल को समाप्त किया जाएगा तथा नया व्यापार शुरू करने वाले लोगों को पहले तीन वर्ष तक कोई इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी ! यहाँ यह प्रश्न उठता है की वर्तमान जीएसटी कर प्रणाली जीएसटी कॉउन्सिल ने तय की है जिसमें कांग्रेस शासित राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल है और अब जब यह एक स्थायी कर प्रणाली का रूप लेने जा रही है ऐसे में कोई दूसरी नई कर प्रणाली लाना इतने बड़े देश में आसान है क्या ! भारत विविधताओं का देश है और विभिन्न वर्गों के लोग यहाँ रहते हैं ऐसे में यदि सभी वस्तुओं पर एक कर लगता है तो निम्न वर्ग अथवा अमीर वर्ग सबको एक समान कर ही देना पड़ेगा जो अपने आप में एक बड़ी विसंगति है ! निम्न आय वाले व्यक्तियों द्वारा उपयोग में लाइ जा रही वस्तुओं पर कर की दर कम हो और संपन्न वर्ग द्वारा उपयोग में लाइ जा रही वस्तुओं की दर अधिक हो, यह आदर्श कर प्रणाली है ! उधर दूसरी ओर अंतर्राज्यीय व्यापार में यदि ई वे बिल को समाप्त कर दिया जाता है तो दो या उससे अधिक राज्यों के बीच होने वाले अवैध व्यापार को कैसे रोका जायेगा ,यह बड़ा सवाल है ! इसके साथ ही व्यापार में अनेक प्रकार के केंद्र एवं राज्य सरकार के कानून हैं जिनके अंतर्गत व्यापार करते समय लाइसेंस अथवा इजाजत लेना आवश्यक है ! इजाजत न लेने की चुनावी घोषणा केवल थोथी है ! जो कानून व्यापारियों पर लगे हैं उनके अंतर्गत लाइसेंस अथवा इजाजत लेना अनिवार्य है अन्यथा व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी ! क्या सरकार पहले उन सभी केंद्रीय कानूनों को बदलेगी और क्या राज्य सरकारें कांग्रेस के कहने पर अपने कानून बदलेंगे !

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