Monday, May 27, 2019
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अपोलो प्रोटाॅन कैंसर सेंटर ने भारत का पहला टोटल मैरो इरेडिएशन प्रोसिजर किया

संवाददाता (चेन्नई) भारत में कैंसर के उपचार में अब तक की पहली उपलब्धि के रूप में, अपोलो प्रोटाॅन कैंसर सेंटर (एपीसीसी), चेन्नई ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट से पूर्व प्रोटोकाॅल के रूप में सफलतापूर्वक टोटल मैरो इरेडिएशन (टीएमआई) किया है।

अपोलो हाॅस्पिटल्स ग्रुप के वाइस-चेयरपर्सन, डाॅ. प्रीता रेड्डी ने कहा, ‘‘अपोलो प्रोटाॅन कैंसर सेंटर ने कैंसर के उपचार की दिशा में नये-नये द्वार खोले हैं और आज यह अत्यंत गौरव का पल है कि लाॅन्च के मात्र कुछ महीने बाद ही, एपीसीसी ने देश में पहली बार टोटल मैरो इरेडिएशन के दो सफल मामलों की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल किया है। यह उपलब्धि भारत में इस सर्वोत्तम एवं आधुनिकतम चिकित्सा तकनीक को लाने में एपीसीसी में हमारे निवेश का सत्यापन करता है। हमें पक्का विश्वास है कि भविष्य में एपीसीसी कई अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेगा और न केवल भारत बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के भी मरीजों के लिए कैंसर के खिलाफ इस जंग को आगे तक ले जायेगा।’’

ओमान की 35-वर्षीया नर्स का दक्षिण-पूर्व एशिया के पहले प्रोटाॅन थेरेपी सेंटर में प्रोसिजर किया गया। उनमें क्रोनिक मायलाॅयड ल्यूकीमिया (सीएमएल) के साथ मिश्रित फेनोटाइपिक एक्यूट ल्यकूमिया का पता चला। डायग्नोसिस के बाद, उनका ओमान में ही 2 साइकल केमोथेरेपी हुआ और थोड़ा सुधार हुआ, फिर उन्हें बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए अपोलो रेफर किया गया। अपोलो के डाॅक्टर्स ने ट्रांसप्लांट की कंडिशनिंग के आधार पर टोटल मैरा इरेडिएशन करने का निर्णय लिया।

18 से 20 अप्रैल, 2019 के बीच टोटल मैरो इरेडिएशन सफलतापूर्वक किया गया और इसके बाद दो दिन केमोथेरेपी चलाई गई। 23 अप्रैल 2019 को, मरीज का पेरिफेरल ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन किया गया।
कुछ प्रकार के कैंसर या ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा सहित अन्य बीमारियों वाले लोग अपने इलाज के हिस्से के रूप में बीएमटी से गुजर सकते हैं। प्रत्यारोपण से पहले, मज्जा में किसी भी कैंसर को मिटाने के लिए कीमोथेरेपी और / या विकिरण दिया जा सकता है। परंपरागत रूप से, टोटल बॉडी इरेडिएशन (टीबीआई) बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन से पहले कंडीशनिंग रेजिमेन का हिस्सा है। इस प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से पूरे शरीर को विकिरण प्रदान करना शामिल है।
डॉ. श्रीनिवास चुलगुरू, वरिष्ठ सलाहकार, विकिरण अंकोलॉजी के अनुसार, “इस मामले में चुनौती अस्थि मज्जा को विकिरण की पर्याप्त खुराक देने और फेफड़ों, हृदय, आंत्र, गुर्दे, यकृत, आंखों और मौखिक गुहा जैसे अन्य सामान्य अंगों को फैलाने में सक्षम थी। आधुनिक विकिरण प्रौद्योगिकी के साथ अब टोटल मैरो इरेडिएशन (टीएमआई) को वितरित करना संभव है, जो विकिरण प्रेरित क्षति से सामान्य अंगों को बचाता है, जिससे अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की उच्च उत्तरजीविता दरों में बदलाव के बिना उत्तरजीविता में सुधार होता है।’’

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