Wednesday, February 19, 2020
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जापान और भारत साझेदारी से कौशल विकास को बढ़ावा देने पर चर्चा

संवाददाता (दिल्ली) एक ओर जापान में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया जा रहा है तो वहीँ दूसरी ओर नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच कौशल विकास पर रणनीतिक चर्चा जारी है. भारत और जापान कौशल विकास के क्षेत्र में तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ाना चाहते हैं. इससे भारत में जापानी निवेश और भी बढ़ने की प्रबल संभावनाएँ हैं. जापान ने संकेत दिए हैं कि वह भारत में न केवल अपनी कंपनियों की संख्या बढ़ाना चाहता है बल्कि भारतीय युवाओं को तकनीकी गुण के साथ जापानी भाषा और सभ्यता सिखाने के लिए भी राजी है. जापान और भारत के बीच इस सहयोग को नरेंद्र मोदी सरकार और कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय की अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.

इस सन्दर्भ में जापान के राजदूत केंजी हिरामात्सु ने भारत सरकार के कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के केन्द्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय से उनके नई दिल्ली स्थित कार्यालय में मुलाकात की. जापानी राजदूत ने डॉ. पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री नियुक्त होने की बधाई दी. इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच कौशल विकास के क्षेत्र में भारत और जापान की भागीदारी को और भी मजबूत बनाने के विषय़ पर गहन विचार विमर्श किया.

भारत और जापान के संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ महेंद्रनाथ पाण्डेय ने कहा “भारत के लिए जापान हमेशा से ही विशेष रहा है। भारत की व्यवस्था में जापान का सहयोग अतुलनीय है। भारत की विशाल युवा आबादी में अपार संभावनाएं हैं, जिसके जरिए हम जापान की अर्थव्यवस्था में सहयोग देने का उद्देश्य रखते हैं। हम जापान की मदद से टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (TITP) को सर्वोच्च स्तर पर ले जाना चाहते हैं और चाहते हैं कि इसके अंतर्गत प्रशिक्षुओं की संख्या बढ़े। इससे युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। जापान से कौशल विकास के क्षेत्र में घनिष्ठता बढ़ाने पर हमारा जोर है और कोशिश है देश के स्कूल-कॉलेजों में जापानी तकनीकी, भाषा और संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो। यह होने पर हमारे युवा ग्लोबल मार्केट के लिए दक्ष कर्मी के रूप में तैयार होंगे।”

सितम्बर 2014 में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जापान यात्रा पर गए थे। इस दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में ‘जापान-भारत निवेश प्रोत्साहन भागीदारी’ की घोषणा हुई थी जिसके तहत भारत में जापान के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा यहां पांच वर्षों में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.

इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए नवम्बर 2016 में भारत सरकार के कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय और जापान सरकार के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय ने दस वर्ष की अवधि के लिए ‘विनिर्माण कौशल अन्तरल प्रोत्साहन कार्यक्रम’ के तहत सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे जिसमें जापान-भारत विनिर्माण संस्थान (जेआईएम) की स्थापना का निर्णय लिया गया था. इस संस्थान में भावी सॉपफ्लोर लीडरों को जापानी शैली में जापानी मानकों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके अतिरिक्त विनिर्माण क्षेत्र में माध्यम प्रबंधन इंजीनियरिंग के लिए भावी उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देने हेतु भारत में मौजूदा इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ जापानी इंडोड पाठ्यक्रम (जेईसी) की स्थापना करने का लक्ष्य भी रखा गया था. जापान की एक रिपोर्ट के अनुसार अभी तक नौ जेआईएम और तीन जेईसी प्रारंभ किये जा चुके हैं.

इसके अलावा 17 अक्टूबर 2017 को एमएसडीई और जापान सरकार के बीच टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम (टीआईटीपी) के सम्बन्ध में एक सहयोग ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया. इस ज्ञापन का उद्देश्य वर्तमान में टीआईटीपी द्वारा दोनों देशों के बीच तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षार्थियों का आदान-प्रदान करना है, इससे दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध सुदृढ़ हुए हैं. जापान सरकार ने नवम्बर 2017 में टीआईटीपी के अंतर्गत नई जॉब श्रेणी के रूप में ‘केयर वर्कर’ को शामिल किया था. टीआईटीपी को भारत में सूचीबद्ध प्रेषक संगठनों के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है.

इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एमएसडीई, कौशल विकास निधि (एनएसडीऍफ़) की सहायता से ‘तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम’ के अंतर्गत प्रशिक्षार्थियों को तकनीकी सहायता प्रदान करने की स्कीम पर विचार कर रहा है.

 

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