Tuesday, February 25, 2020
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राष्ट्रपति से विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद मिली पहली अग्रिम जमानत

संवाददाता (सुलतानपुर) राष्ट्रपति से संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद जिले में पहली बार लूट के आरोपियों की तरफ से जिला जज की अदालत में अग्रिम जमानत की मांग को लेकर अर्जी प्रस्तुत की गयी। जिस पर सुनवाई के पश्चात प्रभारी जिला न्यायाधीश प्रशांत मिश्र ने आरोपियों की अर्जी स्वीकार करते हुए सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने आरोपियों के विरूद्ध उत्पीड़नात्मक कार्यवाही को लेकर अगले तिथि तक रोक लगा दी है। इस सम्बंध में लोक अभियोजक व एसपी अमेठी को भी पत्र भेजने का कोर्ट ने आदेश दिया।
मालूम हो कि वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य में अग्रिम जमानत की व्यवस्था खत्म कर दी गयी थी। उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड को छोडकर बाकी राज्यों में यह व्यवस्था बाद में शुरू हो गयी थी। इस बीच उत्तर प्रदेश राज्य में संज्ञेय अपराधों में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर लगातार याचिकाएं दाखिल हो रही थी। जिससे कोर्ट के कार्यां में बाधा प़ड़ती थी। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत का कानून लागू करने के लिए राज्य सरकार से कहा था। राज्य विधि आयोग ने भी एक दशक पूर्व इस व्यवस्था को फिर से लागू करने की सिफारिश की थी। जिसके बाद बहुप्रतिक्षित मांग को स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दंड प्रक्रिया संविदा की धारा 438 में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। जिसके उपरांत यूपी में भी अग्रिम जमानत की व्यवस्था लागू हो गयी।
गुरूवार को सुलतानपुर जिला न्यायालय में पड़ी पहली अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई चली। इस मामले में संग्रामपुर थाना क्षेत्र के बड़ा गांव निवासी आरोपी वीरेन्द्र सिंह व कल्लू सिंह ने स्वयं को लूट के आरोप में फर्जी ढ़ंग से फंसाने का तर्क रखते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार मिश्रा ने अभियोगी रामाकांत गुप्ता के जरिए लगाये गये आरोपों को निराधार बताया और अग्रिम जमानत अर्जी को हाईकोर्ट के निर्देशन में शीघ्र निस्तारण की मांग की। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात प्रभारी जिला जज प्रशांत मिश्र ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है।
अदालत ने शर्त रखी है कि विवेचना में आरोपीगण पूर्ण सहयोग करेंगे। साथ ही अग्रिम सुनवाई तक आरोपियों के विरूद्ध किसी भी तरीके की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने आवश्यक कार्यवाही के सम्बंध में लोक अभियोजक व पुलिस अधीक्षक अमेठी को भी सूचित करने का आदेश दिया है। इमरजेंसी लागू होने के बाद यह अग्रिम जमानत जिले की ही नही बल्कि प्रदेश की पहली जमानत मानी जा रही है। मामले में सुनवाई के लिए आगामी पांच जुलाई की तिथि तय की गयी है।

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