Tuesday, October 22, 2019
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दिल की जटिल जन्मजात बीमारी से युक्त हार्ट अटैक से पीड़ित बच्ची का इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स में किया गया इलाज

  संवाददाता (दिल्ली) इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स के डाॅक्टरों ने तीन सप्ताह की एक बच्ची इनाया को नई ज़िंदगी दी है जो दिल की दुर्लभ बीमारी एनामैलस लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी फ्राॅम द पल्मोनरी आर्टरी से पीड़ित थी। बुलंदशहर की निवासी इनाया को सांस की समस्या, तेज़ सांसों और बहुत ज़्यादा पसीने की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया। जब उसके माता-पिता उसे लेकर अपोलो हाॅस्पिटल्स के एमरजेन्सी विभाग पहुंचे, तब बच्ची को हार्ट अटैक हुआ था, यानि उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया था।
डाॅ मुथु जोथी, सीनियर कन्सलटेन्ट, पीडिएट्रिक कार्डियोथोरेसिक सर्जन, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स ने बताया, ‘‘एमरजेन्सी रूम में एक चमत्कार हुआ, जब डाॅक्टरों द्वारा उसके दिल पर मसाज करने से बच्ची पुनर्जीवित हो गई। तुरंत इंटेंसिव केयर के डाॅक्टरों को बुलाया गया और 40 मिनट के अंदर उसका दिल फिर से धड़कने लगा। इसके बाद बच्ची को दवाओं पर रखा गया, उचित इलाज दिया गया ताकि उसका दिल ठीक से काम करता रहे। 30-40 मिनट तक कार्डियक फंक्शन नहीं होने के बावजूद बच्ची के दिमाग को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, उसके शरीर के सभी मुख्य अंग ठीक से काम कर रहे थे।’’
बच्ची की बीमारी के बारे में बात करते हुए डाॅ मुथु ने कहा, ‘‘एएलसीएपीए दिल की जन्मजात बीमारी है जिसमें कार्डियक मसल्स (दिल की मांसपेशियां) को ब्लड सप्लाई (खून की आपूर्ति) करने वाली बायीं कोरोनरी आर्टरी आर्योटा के बजाए पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ी हेती है। इस वजह से दिल की बायीं ओर की मांसपेशियों (कार्डियक मसल्स) को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, और इस हिस्से में बिना ऑक्सीजन वाला खून ही पहुंचता है। व्यस्कों में इस स्थिति को हार्ट अटैक से अलग नहीं कहा जा सकता। कोरोनरी आर्टरी रोगों के मामले में जब व्यक्ति की रक्त वाहिकाएं ब्लाॅक हो जाती है, तब भी कुछ ऐसा ही प्रभाव होता है, जिसका परिणाम व्यस्कों में हार्ट अटैक के रूप में सामने आता है।’’
ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिलने के कारण इनाया के दिल की मांसपेशियां फैलने लगीं और बायें एट्रियम (उपरी चैम्बर) और बाएं वेंट्रिकल (नीचला चैम्बर) के बीच का मिट्रल वाॅल्स लीक होने लगा। इसके कारण जब भी बायां वेंट्रिकल सिकुड़ता, खून फेफड़ों में पहुंच जाता। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का कार्डियक आउटपुट बहुत कम होता है, उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है, छाती में अकड़न महसूस होती है और पेशाब करने में भी परेशानी होती है। इनाया का रक्त का प्रवाह बहुत की कम था, जिसके चलते उसका शरीर ठंडा पड़ रहा था।
बच्ची को वेंटीलेटर पर रखा गया, डाॅ मुथु जोथी ने बच्ची के माता-पिता को बता दिया था कि उसका जोखिम स्तर 50-70 फीसदी है, उन्होंने जोखिम को स्वीकार करते हुए सर्जरी के लिए सहमति दे दी। अगले दिन 13 मई 2019 को बच्ची की सर्जरी की गई।
सर्जरी की जटिलता के बारे में बात करते हुए डाॅ जोथी ने कहा, ‘‘हमनें पल्मोनरी आर्टरी से ब्लड वैसल को हटाया और इसे आर्योटा में ट्रांस-लोकेट किया गया। इसके कारण पल्मोनरी आर्टरी केे पीछे बने अंतर को कार्डियक कवर पेरीकार्डियम से भरा गया। इससे दिल की मांसपेशियों को आर्योटा से ऑक्सीजन युक्त रक्त मिलने लगा; सर्जरी के बाद, बच्ची के दिल में बहुत ज़्यादा सूजन आ गई, इसलिए हमने छाती की हड्डी को खुला छोड़ा। रात के समय बच्ची का यूरीन आउटपुट बहुत अच्छा था, इसलिए अगले दिन मैंने मैंने उसकी छाती की हड्डी को बंद किया। बच्ची को अगले 2-3 दिन तक वेंटीलेटर पर रखा गया और अगले 10 से 12 दिनों के बाद बच्ची छुट्टी के लिए तैयार थी।
डाॅ जोथी ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, ‘‘यह मामला बहुत मुश्किल था क्योंकि बच्ची को हार्ट अटैक हुआ जो 40 मिनट तक चला, जिसके बाद बच्ची को पुनर्जीवित कर स्थिर किया गया। हालांकि भगवान की कृपा और अपोलो की एमरजेन्सी टीम के कौशल के कारण बच्ची को नया जीवन मिला है। आज वह ठीक है और नियमित रूप से फाॅलो-अप क लिए अस्पताल आती है।

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