Monday, March 30, 2020
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अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर अपोलो हाॅस्पिटल्स ने युवाओं के लिए मानसिक फिटनैस के महत्व पर ज़ोर दिया

संवाददाता (दिल्ली) 2020 तक भारत की कुल आबादी में 34.33 फीसदी युवा होंगे। एक अनुमान के अनुसार भारत में 57 मिलियन युवा (विश्वस्तरीय अनुमान का 18 फीसदी) हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसोर डिप्रैशन यानि अवसाद का शिकार हैं। साल दर साल मानसिक बीमारियों से पीड़ित युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई अध्ययनों और अनुसंधानों से साफ हो गया है कि युवाओं में मानसिक विकारों जैसे डिप्रैशन, चिंता, तनाव एवं नशीली पदार्थों की लत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सोशल मीडिया पर ढेरों दोस्त होने के बावजूद वे अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा काम, शिक्षा में परफोर्मेन्स का तनाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ता है।

इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स में साइकोलोजी में सीनियर कन्सलटेन्ट डाॅ एकता सोनी तनाव प्रबंधन के लिए कुछ सुझाव लेकर आई हैंः

1.   नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करेंः शारीरिक व्यायाम तनाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। आप किसी भी तरह का व्यायाम सकते हैं जैसे सैर करना, दौड़ना, वर्कआउट, पावर योगा, एरोबिक्स और कार्डियो।

2.   पूरी नींद लेंः स्कूल के दिनों के दौरान होमवर्क, गतिविधियों, दोस्तों से मिलना, इन सब कामों के बीच किशोर अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते। किशोरों को कम से कम नौ घण्टे की नींद ज़यरी है। लेकिन आजकल ज़्यादातर किशोर इससे कम नींद ले पाते हैं। नींद पूरी करने के लिए टीवी देखने या स्क्रीन का समय घटाएं। शाम के बाद कैफीन से युक्त उत्पादों का सेवन न करेंगे। सोने से कुछ घण्टे पहले स्टिमुलेटिंग गतिविधियां न करें।

3.      संतुलन बनाएंः काम, घर और सोशल लाईफ के बीच संतुलन बनाएं।
4.        पीएमआर तकनीक से अपनी मांसपेशियों को रिलेक्स करेंः इस तकनीक में शरीर की मांसपेशियों को रिलेक्स करना चाहिए। अभ्यास से आप कुछ घण्टों के अंदर तनाव पर नियन्त्रण पाने का तरीका सीख सकते हैं। पीएमआर तकनीक खासतौर पर छात्रों के लिए फायदेमंद है, नीदं से पहले, टेस्ट के दौरान इसका इस्तेमाल कर छात्र तनाव से राहत पा सकते हैं।

5.      सेहतमंद आहार लेंः आप मानें या न मानें अच्छा आहार आपके दिमाग को ताकतवर बनाता है, आपकी मानसिक उर्जा बढ़ाता है! सेहतमंद आहार न केवल तनाव प्रबंधन में मदद करता है, बल्कि यह आपको सक्रिय भी बनाता है। आहार में सुधार लाकर आप कई समस्याआंे जैसे मूड में बदलाव, सिर में भारीपन आदि से बच सकते हैं।

6.      अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ जुड़े रहेंः आपके दोस्त और परिवारनजन तनाव प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह ज़रूरी है कि हम अपनी रोज़मर्रा की चीज़ों को परिवारजनों के साथ साझा करें। इस दूसरे के साथ विचारों के आदान-प्रदान से हमें अपनी समस्याओं का समाधान मिलता है और तनाव से राहत मिलती है।

7.      डाॅक्टर की सलाह लेंः अगर आपको नींद न आना, एकाग्रता में कमी, रोज़मर्रा के कामों में रूचि की कमी, मूड में बदलाव, विचारों में बदलाव जैसे लक्षण दो सप्ताह से ज़्यादा दिखाई दें तो बेहिचक काउन्सलर या साइकोलोजिस्ट की सलाह लें।

तनाव हमारे शरीर का एक तरीका है जिसके द्वारा शरीर हमें बताता है कि हम अपनी सभी ज़रूरतों को पूरा करने या समस्याओं को हल करने के लिए जूझ रहे हैं। इसकी वजह से व्यक्ति को सिर में दर्द या नींद की समस्याएं हो सकती है। इसका असर हमारे शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता पर भी पड़ता है। उदाहरण के लिए तनाव के दौरान हम अपने आप को बीमार महसूस कर सकते हैं। हम थकान, चिड़चिड़ापन और अवसाद महसूस करते हैं इसका असर हमारी सोचने की क्षमता, एकाग्रता और प्रतिक्रिया के तरीके पर पड़ता है। बहुत ज़्यादा तनाव मानसिक बीमारी या रिलेप्स का कारण भी बन सकता है।

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