Tuesday, August 20, 2019
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ईपीएफओ मुख्यालय पर देश भर से आए बुजुर्ग पेंशनर्स ने किया भारी प्रदर्शन और घेराव , किया आर पार के लड़ाई का ऐलान

संवाददाता (दिल्ली) ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर ईपीएस-95 के पेंशन धारक ने शुक्रवार को देश की राजधानी दिल्ली में ईपीएफओ ऑफिस का घेराव कर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। ऑल इंडिया ईपीएस-95 पेंशनर्स संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने बताया कि ईपीएस-95 के 60 से 80 वर्ष के बुजुर्ग पेंशनधारक शुक्रवार की दोपहर नई दिल्ली में भीकाजी कामाजी प्लेस स्थित  ईपीएफओ के हेड ऑफिस पर एकत्र हुए। इस अवसर पर ईपीएफओ की सांकेतिक शव यात्रा भी निकाली गई। 31 मार्च 2017 को ईपीएफओ कार्यालय की अंतरिम एडवाइजरी कमिटी के पत्र को भी आग के हवाले किया गया। इसी कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल में लाने से रोका था और पेंशनर्स को उनकी वास्तविक सैलरी पर पेंशन लेने से महरूम किया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की याचिका को खारिज करते हुए 1 अप्रैल को केरल हाईकोर्ट के उसे फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें ईपीएस-95 के पेंशनर्स को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से बढ़ी हुई पेंशन देने का आदेश दिया गया था। बुजुर्ग पेंशन धारक हाई पावर्ड मॉनिटरिंग कमिटी की रिपोर्ट की होली जलाएंगे, जिसने कमरतोड़ महंगाई के जमाने में बुजुर्गों को केवल 2000 रुपये पेंशन देने की सिफारिश की है।
राउत ने कहा जिन पेंशन धारकों ने अपने पूरे जीवन भर हर महीने की कमाई से 417, 541 और 1250 रुपये पेंशन फंड में जमा कराए और जिसका मूल्य करीब 20 लाख रुपये बैठता है, उन्हें रिपोर्ट में केवल 2000 रुपये पेंशन देने की सिफारिश करने से पेंशनधारकों में ईपीएफओ के प्रति रोष चरम सीमा पर है।
उन्होंने बताया कि पेंशनधारक 2013 की कोशियारी समिति की सिफारिशों के अनुसार 7500 रुपये मासिक पेंशन, उस पर 5000 रुपये महंगाई भत्ते और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वास्तविक वेतन पर उच्चतम पेंशन की मांग कर रहे हैं। पेंशनधारकों का यह भी कहना है कि जिन रिटायर्ड कर्मचारियों को ईपीएफ योजना में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें पेंशन योजना में लाया जाए या 5000 रुपये की राशि पेंशन के तौर पर दी जाए।
कमांडर अशोक राउत ने बताया कि पेंशन धारकों के मामले में एक्सपर्ट कमिटी और कोशियारी समिति की रिपोर्ट सरकार के पास थी, लेकिन इसके बावजूद जनवरी 2018 में एक दूसरी हाई इंपावर्ड मॉनिटरिंग कमिटी का गठन किया गया। इस रिपोर्ट में पेंशन धारकों को इस महंगाई के जमाने में 2000 रुपये मासिक पेंशन देने की सिफारिश की गई, जो पूरी तरह अमानवीय, अन्याय और भेदभावपूर्ण है।

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