Tuesday, October 22, 2019
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आस्था और श्रध्दा से विश्व सुसंस्कृत बनेगा : सुमित्रा महाजन

  संवाददाता (पुणे) लोकसभा की पूर्व सभापति सुमित्रा महाजन ने कहा कि आस्था और श्रध्दा दोनों को मिलाकर काम करने से विश्व सुसंस्कृत और समाज सभ्य बनेगा. विज्ञान, धर्म, दर्शनशास्त्र इन तीनों बाते हमारी जीवन पध्दती बनती है. वर्तमान दौर में पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की है. इसलिए विकास के साथ पर्यावरण रक्षा के लिए सबको एकत्रीत आने की भी अपील की.
विश्व शांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआइटी और एमआइटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांचवी विश्व सांसद के समापन समारोह पर एमआइटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने जीवन भर किए अद्वितिय कार्य को देखते हुए उन्हें  “विश्व विज्ञान दार्शनिक अवार्ड” से नवाजा गया. पुरस्कार के रूप में ताम्रपत्र, गांधी टोपी, तुलशी और सुत का हार पहनाया गया. उन्हे यह पुरस्कार नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय दर्शन परिषद तथा नई दिल्ली के इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफीकल रिसर्च की ओर से प्रदान किया गया.
इस समय ई बुक ‘मेकिंग भारत ए विश्व गुरू’ का विमोचन सुमित्रा महाजन के हाथों हुआ.
विश्वराजबाग, लोणी कालभोर स्थित विश्व के सबसे बडे गुंबद के तत्वज्ञ संतश्री ज्ञानेश्वर माऊली, विश्व शांति प्र्रार्थना सभागार में आयोजित कार्यक्रम दौरान विख्यात कम्प्यूटर विशेषज्ञ पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर, डॉ. आर.सी सिंहा, प्रो. अंबिका दत्ता शर्मा तथा  प्रो. डॉ. अशोक वोरा, अमेरिकन गांधी बर्नी मेयर सम्माननीय अतिथि के रुप में उपस्थित थे.
साथ ही एमआइटी वर्ल्ड पीस युनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष राहुल विश्वनाथ कराड, एमआइटी एडीटी युनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष प्रो.डॉ. मंगेश तु. कराड, डब्ल्यूएचओ के सलाहकार डॉ. चंद्रकांत पांडव, माईर्स एमआइटी के संस्थापकीय सहविश्वस्त प्रो.पी.बी.जोशी, माईर्स एमआइटी के अधिष्ठाता प्रो. शरदचंद्र दराडे पाटिल, एमआइटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ.एस. परशूरामन, प्र कुलपति प्रो.डॉ. आर.एम.चिटणीस, प्रो. डॉ. मिलिंद पांडे और प्रो.डी.पी.आपटे आदि उपस्थित थे.
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, मै छोटे गांव से आया हूं. मेरी बडी बहन पूर्णब्रह्मयोगिनी त्यागमूर्ति कराड अक्का ने जीवन की राह दिखाई. यह गुंबद भारतीय संस्कृति, परंपराओं का सहीं स्वरूप है जो मानव कल्याण के लिए है.  जिन्होंने सारी दुनिया का इतिहास बनाया ऐसी महानुभवों की मूर्तियां यहां मौजूद है. भारत माता के लिए बना यह गुंबद भारतीय संस्कृति का दर्शन है. सारी दुनिया के लिए यह ज्ञान केंद्र बन सकता है.
राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि, अगले 25 साल के बाद इस गुंबद का जीक्र सारी दुनिया में एक दार्शनिकशास्त्र के रूप में उभकर आएगा. अगले साल इस सम्मेलन में 200 विश्वविद्यालय से एक हजार छात्र पधारेंगे ऐसी तैयारी करेंगे. साथ ही उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया.
पश्चात प्रो. डॉ. अशोक वोरा ने भी समयोचित विचार रखे.
प्रो. मिलिंद पांडे ने सम्मान पत्र का वाचन किया. इस संसद में कुल 7 प्रस्ताव को पारित किया गया. जिसका वाचन प्रो.डॉ. आर.एम.चिटणीस ने किया.
प्रो.गौतम बापट ने सूत्रसंचालन किया. प्रो. डी.पी. आपटेे ने आभार माना.

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