Friday, November 22, 2019
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बीरेंद्र चंद्र चक्रबर्ती ‘ठाकुर श्री श्री बालक ब्रह्मचारी मबीरेंद्र चंद्र चक्रवर्ती महाराज’ के जन्मदिवस को ‘सार्वभौमिक श्रमिक दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा

संवाददाता (दिल्ली) केंद्रीय जन्मदिवस उत्सव समिति ’कोलकाता में जाने-माने आध्यात्मिक गुरु और धार्मिक उपदेशक ‘बालक ब्रह्मचारी महाराज’ की शताब्दी मनाने जा रहा है। ‘परमपिता जन्मसिध्य ठाकुर श्री बालक ब्रह्मचारी महाराज’ की 100वीं जयंती 27 अक्टूबर को रानी राशमोनी एवेन्यू, कोलकाता में यूनिवर्सल वर्कर्स डे (कर्मी दिवस) के रूप में मनाई जाएगी। इस दिन को भारत में काली पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। इसके बाद 3 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में एक और अध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। देश भर के उनके लाखों शिष्य और अध्यात्मिक साधक दोनों आयोजनों में भाग लेंगे।

आयोजन के बारे में बोलते हुए, ‘केंद्रीय जन्मदिवस उत्सव समिति’ के सचिव, जयंता डे ने कहा, “ये अध्यात्मिक सभा महान वैदिक भजन, ‘राम नारायण राम महाराज’, के पाठ सहित कई सांस्कृतिक, अध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों को चिह्नित करेगी। महाराज जी मानते हैं कि हमारे जीवन और अस्तित्व के पीछे एक बड़ा अर्थ और कारण है। यह हमारे गुरु का आशीर्वाद है कि हम शांति और सार्वभौमिक भाईचारे के उनके संदेश का प्रचार करने में सक्षम रहे हैं।”

कोलकाता में होने वाले कार्यक्रम का नेतृत्व सियालदह और हावड़ा स्टेशनों पर महाराज बालक ब्रह्मचारी के शिष्यों और अनुयायियों द्वारा किया जाएगा।

माना जाता है कि बालक ब्रह्मचारी महाराज अपने अनुयायियों के बीच अध्यात्मिक शक्तियों और दिव्यता से धन्य हैं। उनका जन्म बांग्लादेश के एक छोटे से शहर बिक्रमपुर में हुआ था, जिन्हें भारत में “बीरू” कहा जाने लगा। लगातार प्रकृति की भाषा और सृष्टि के पीछे के रहस्य या मनुष्यों के अस्तित्व को समझने में वो सफल रहे थे। “बीरु” – बीरेंद्र चंद्र चक्रवर्ती ने पांच साल की उम्र से “दीक्षा” देना शुरू कर दिया था – मंत्र या प्रकृति की धुन।

माना जाता है कि कई लोगों को उनके अनगिनत चमत्कारों को देखने का मौका मिला, जिनसे प्रकृति की धुन का सार सिखाया गया। दूसरी ओर, उनका दिव्य प्रेम, करुणा, संपूर्ण हृदय को स्पर्श करता है। प्रकृति का उनका उपदेश सारी सीमाओं को पार कर गया। वह जल्द ही पूरे भारत में बालक ब्रह्मचारी ’के रूप में जाना जाने लगे, जो शांति, सद्भावना और सार्वभौमिकता का संदेश साझा करते आये।

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