Tuesday, February 25, 2020
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अपोलो हॉस्पिटल्‍स के विशेषज्ञों ने भारत में श्रवण स्वास्‍थ्‍य (हियरिंग हेल्‍थ) पर की चर्चा                                     

     संवाद (दिल्ली)  इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स में इसकी कोचलियर इम्‍प्‍लांट टीम द्वारा आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भारत में हियरिंग हेल्थ (श्रवण संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य) के कारणों पर चर्चा की। बचाव इलाज से बेहतर है और यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग (UNHS), अपोलो हॉस्पिटल्स के बच्चों के श्रवण स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग को अनिवार्य बनाना इस उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में सही निर्णय साबित होगा। अपोलो हॉस्पिटल्स के कोचलियर इम्‍प्‍लांट प्रोग्राम के 14 साल पूरे होने पर आयोजत एक कार्यक्रम में यह बात खुल कर सामने आई। 2005 से, अपोलो हॉस्पिटल्स 1500 बच्चों का श्रवण प्रत्यारोपण (हियरिंग इम्‍प्‍लांट) कर उनके जीवन में खुशियों की आवाज़ें लेकर आया है।
इम्‍प्‍लांट को कोचलियर बनाने के लिए ग्लोबल हियरिंग एंबेसडर ब्रेट ली, के साथ श्री पी शिव कुमार, सीईओ, अपोलो हॉस्पिटल्स, डॉ अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, डॉ (प्रोफ़ेसर) अमीत किशोर, ENT और कोचलियर इम्प्लांट सर्जन, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स और सुश्री नीविता नारायण, ऑडियोलॉजिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट (SpHear) और अपोलो हॉस्पिटल्स के लिए कोचलियर इंप्लांट विशेषज्ञ ने मिलकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। उन्होंने न्‍यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग के महत्‍व पर अपनी जानकारियां भी साझा कीं, और सरकार से देश भर में UNHS को अनिवार्य करने का आग्रह किया।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन  के अनुसार, उल्‍लेखनीय बहरेपन से जूझ रहे 466 मिलियन लोगों में से 34 मिलियन बच्चे हैं; UNHS का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नवजात शिशुओं की जन्म के समय ही हियरिंग स्‍क्रीनिंग की जाए।
भारत में, 6.3 प्रतिशत जनसंख्या – 2009 में अनुमानित 63 मिलियन लोग – महत्वपूर्ण हियरिंग लॉस से पीड़ित हैं। हर हजार बच्चों में से चार बच्चे गंभीर रूप से बहरेपन से पीड़ित हैं; लगभग 100,000 बच्चे हर साल हियरिंग डेफिशिएंसी के साथ जन्‍म लेते हैं। नेशनल सेम्पल सर्वे – 2002 में 58वां दौर – ने भारतीय घरों में विकलांगता का सर्वेक्षण किया और इसमें पाया गया कि श्रवण विकलांगता, विकलांगता का दूसरा सबसे सामान्य कारण और संवेदनाओं की कमी का सबसे बड़ा कारण है।
ब्रेट ली ने इस कार्यक्रम में कहा, “अपोलो जैसी संस्थाओं को इतने बच्चों के जीवन में, और उनके परिवारों के जीवन में सुनने का आनंद लाने में सक्षम करना मेरे लिए अत्यंत गर्व की बात है। सुनने की अक्षमता का इलाज हो सकता है लेकिन ज़्यादा लोगों को उपलब्ध उपचारों की जानकारी नहीं है। इस तरह की जागरूकता पहल नवजात शिशुओं के माता-पिता और परिवारों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे UNHS के बारे में जागरूकता पैदा होती है। मुझे UNHS के नेक कार्य; इन प्रयासों के साथ के साथ जुड़ने पर गर्व है, हम एक टीम के रूप में, यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर कोई रोजमर्रा की जिंदगी की आवाज़ों का अनुभव कर सके।”
श्री पी. शिवकुमार, सीईओ, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, “हियरिंग हेल्थ भारत में चर्चा का महत्तवपूर्ण विषय नहीं है। अपोलो हॉस्पिटल अन्य हितधारकों के साथ मिलकर हियरिंग हेल्‍थ पर UNHS को नवजात शिशुओं पर किये जाने वाले दूसरे परीक्षणों के साथ अनिवार्य परीक्षण बनाने के लिए एक एडवोकेसी कैम्‍पेन लागू करेगा। UNHS व्यापक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे देशों में प्रचलित है; भारत में नवजात शिशुओं के लिए एक “ऑल-इनक्लूसिव” स्क्रीनिंग कार्यक्रम स्थापित करना बाकी है। हमारी आंखें और कान दुनिया को देखने की खिड़कियां हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि ये दोनों अंग ठीक से काम करें।”
डॉ अनुपम सिब्बल ने अपने उद्बोधन में कहा, “आज, हमने यूनिवर्सल न्यूबर्न हियरिंग स्क्रीनिंग कार्यक्रम के 14 साल पूरे किये हैं जो एक गर्व की अनुभूति और उत्सव का क्षण है। हम सुनने की क्षमता का अनुभव करने में मदद करके 1500 बच्चों के जीवन में बदलाव लेकर आये हैं। हम वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल करने और अपने रोगियों को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेंगे। ”

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