Tuesday, February 25, 2020
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यूथ की आवाज समिट में नौजवानों के आइडियाज मचाएंगे तहलका, बदलाव की रखेंगे नींव

संवाददाता (दिल्ली) इस समय देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ व्यापक स्तर पर सामाजिक और राजनैतिक अंसतोष फैला है। इसी समय देश में नौजवानों पर प्रभाव डालने वाले सबसे बड़े कार्यक्रमों में एक यूथ की आवाज समिट के दूसरे संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में उन सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिससे भारत में नौजवानों पर प्रभाव पड़ रहा है। सम्मलेन में विभिनिन मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें स्वतंत्र रूप से विचारों की अभिव्यक्ति के लिए ऑनलाइन के शानदार प्लेटफॉर्म बनकर उभरने पर तो विभिन्न विचार सामने आएंगे। इसके लावा युवाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर उठ रहे खतरों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। युवाओं की सेहत, विशेषकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के उपाय पर चर्चा की जाएगी। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता तक सभी महिलाओं की पहुंच बनने के मसले पर भी विभिन्न वर्गों के लोग अपने विचार रखेंगे।
यूथ की आवाज समिट के दूसरे संस्करण का आयोजन 20 और 21 दिसंबर को नई दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशशल सेंटर में किया जाएगा।
2018 में लॉन्च “यूथ की आवाज” समिट अब ऐसा इकलौता सबसे बड़ा फोरम बन गया है, जहां नौजवान भारतीय दुनिया भर को निश्चित आकार में ढाल रहे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। उन पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं और इन पर कार्रवाई के लिए कदम उठा सकते हैं। केवल एक वर्ष के समय में समिट गैर पक्षपातपूर्ण और फैसले लेने से अलग हटकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है, जहां पर नौजवान समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर स्वतंत्र ढंग से विचार कर सकते हैं, मंथन कर सकते हैं, वाद-विवाद कर सकते है और उन मुद्दों के पक्ष और विपक्ष में अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं।
समाज को बदलने में जुटे 40 से ज्यादा चेंजमेकर्स के स्वतंत्र और निष्पक्ष विचारों की गूंज सम्मेलन में 2 दिन तक सुनाई देगी। “यूथ की आवाज” समिट के दूसरे संस्करण में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता को अपनाने, जलवायु परिवर्तन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता समेत अन्य मुद्दों पर पुरजोर ढंग से आवाज बुलंद की जाएगी।
“यूथ की आवाज” के संस्थापक और निदेशक श्री अंशुल तिवारी ने कहा, “समिट में कई पैनल और वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा, जो युवाओं को कई मोर्चों पर मजबूत बनाएंगे। आजकल समाज में दिखाई दे रही असंतोष की भावना को ध्यान में रखते हुए वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है कि हम में से हरेक व्यक्ति भारत के विकास के लिए कंधे से कंधा मिलकर एक एकजुट होकर काम करें। हर भारतीय को मजबूत बनना आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है। इस बार हमने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पैनल पर भी डिस्कशन शुरू करने का फैसला किया है। पैनल में खाने की, प्यार करने की, कपड़े पहनने की, किसी भी धर्म का पालन करने की से स्वतंत्रता के साथ विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी पर खुलकर चर्चा की जाएगी। समिट के एक सेशन में भारत के नौजवानों के लिए प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें चुनाव के समय राजनैतिक दलों की ओर से किए गए वायदों पर भी विचार-विमंर्श होगा। सम्मेलन में इस विषय पर भी चर्चा की जाएगी कि राजनैतिक दल नौजवानों को प्रभावित करने के लिए किस तरह अपनी कैंपेन चला सकते हैं और युवाओं से किस तरह अपनी पार्टी को वोट देने की अपील कर सकते हैं।

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