Tuesday, February 25, 2020
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सर्दियों की आम बीमारियां और इनके उपचार

दिल्ली/एनसीआर इस समय भीषण सर्दी की चपेट में है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट का अनुमान है। डाॅक्टर तरूण साहनी, सीनियर कन्सलटेन्ट, इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स ने सर्दी से बचने के कुछ सुझाव दिए हैं।
सर्दियों में तापमान में गिरावट के साथ शरीर का तापमान गिरने लगता है। साथ ही शरीर बदलते तापमान के साथ अपने आप को एडजस्ट करने की कोशिश करता है। परिणामस्वरूप कई बार व्यक्ति बीमारियों की चपेट में आ जाता है। इन दिनों बच्चों और व्यस्कों दोनों के बीमार होने की संभावना होती है।
सर्दियों में बच्चों को प्रभावित करने वाली बीमारियां
आम सर्दी, जु़काम और बुखार
कारणः बच्चों की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती है, इसलिए उनमें बदलते मौसम का असर जल्द हो जात है और अक्सर इस मौसम में वे खांसी, सर्दी जुकाम से पीड़ित हो जाते हैं।
लक्षणः बुखार, नाक बंद होना, नाक बहना, गले में खराश, छाती में कन्जेशन, सिरदर्द, थकान
उपचारः बाज़ार में उपलब्ध दवाओं का इस्तेमाल बिना सलाह के न करें। किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले डाॅक्टर की सलाह लें।
टोन्सिल संक्रमण
कारणः ठंडा खाने, वायरस या बैक्टीरिया के कारण
लक्षणः गले में सूजन, गले में दर्द, टोन्सिल्स बढ़ना, भोजन या तरल पदार्थ निगलने में परेशानी
उपचारः गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारे करें। डाॅक्टर की सलाह लें।
ब्रोंकाइटिस
कारणः यह आमतौर पर वायरल संक्रमण से होता है और आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
लक्षणः फेफड़ों के वायु मार्गों में सूजन और म्यूकस बनना
उपचारःडाॅक्टर की सलाह लें।
पेट में संक्रमण  या फ्लू
कारणः सक्रंमित पानी, या भोजन का सेवन करने से, गंदे हाथों से
लक्षणः पेट में दर्द, डायरिया, पेट फूलना, उल्टी, बुखार
उपचारः डाॅक्टर की सलाह लें, बच्चे को खूब पानी एवं तरल पदार्थ दें।
चिकन पोक्स /चेचक
कारणः हवा में संक्रमण से या बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से
लक्षणः यह दुनिया के सबसे संक्रामक रोगों में से एक है। बच्चे की त्वचा पर फफोले पड़ जाते हैं, जिनमें खुजली होती है। ये फफोले और रेश संक्रामक होते हैं।
उपचारः अगर समय पर निदान हो जाए तो हल्की दवाएं भी काम कर जाती हैं। फफोलों पर खुजली न करें, रोज़ाना के कपड़े एवं अन्य सामान को अलग रखें। डाॅक्टर की सलाह लें।
कान में एक्यूट संक्रमण
कारणः बहुत ज़्यादा ठंड से कभी-कभी कान में संक्रमण हो जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि कान में नमी से बैक्टीरिया पैदा होते हैं जो इन्फेक्शन पैदा कर सकते हैं।
लक्षणः कान में दर्द, कान बंद होना, कान में खुजली। कान में संक्रमण रातों-रात भी हो सकता है। इसलिए इसे जल्द से जल्द पहचान कर इलाज करना चाहिए।
उपचार: इस स्थिति में मरीज़ को कान में दर्द होता है, इसलिए डाॅक्टर की सलाह लें।
व्यस्कों में सर्दियों के कारण होने वाली बीमारियां
खांसी और कफ
कारणः सर्दियों में ठंडी हवाओं के साथ धूल और खुश्की भी बढ़ जाती है। इससे व्यक्ति कभी कभी खांसी और गले में इन्फेक्शन का शिकार हो जाता है।
लक्षणः कफ़ के साथ खांसी, खांसी में बार्किंग या सील जैसी तेज़ आवाज़
उपचारः हल्की खांसी का इलाज आसानी से संभव है, हालांकि ऐसे मामलों में नेबुलाइज़र या स्टेराॅयड की ज़रूरत पड़ सकती है। अपने आप इलाज करने के बजाए हमेशा डाॅक्टर की सलाह लें।
सर्दी लगना
कारणः बार-बार ठंडे गर्म के सम्पर्क में आने से त्वचा के आस-पास मौजूद ब्लड वैसल्स जल्दी-जल्दी फैलती-सिकुड़ती हैं, जिससे व्यक्ति को सर्दी लग जाती है।
लक्षणः खुजली, लाल धब्बे, हाथों-पैरों में सूजन और फफोले
उपचारः अपने आप को सर्दी से बचाएं। यह कभी कभी इन्फेक्शन का कारण भी बन सकता है, जो इलाज न करने पर ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
सांस की बीमारियां
कारणः पहले से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से व्यक्ति सांस की बीमारियों से संक्रमित हो सकता है। सर्द और खुश्क हवा के कारण वायुमार्ग संकरे हो जाते हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी महसूस होती है।
लक्षणः अस्थमा, सीओपीडी, सांस लेने में परेशानी, ज़्यादा सर्दी में लक्षण और गंभीर हो जाते हैं।
उपचारः हमेशा इन्हेलर अपने पार रखें। एमरजेन्सी की स्थिति में डाॅक्टर से संपर्क करें।
हार्ट अटैक
कारणः सर्दियों में हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। तापमान गिरने के कारण धमनियां सिंकुड़ जाती हैं, जिससे दिल के लिए खून को पम्प करना मुश्किल हो जाता है।
लक्षणः हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण है छाती में दर्द और असहज महसूस करना
उपचारः डाॅक्टर उचित निदान के बाद दवाएं देते हैं।
स्ट्रोक
कारणः सर्दी को संपर्क में आने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, ब्लड वैसल्स सिकुड जाती हैं, जिससे ब्लड क्लोट होने की संभावना बढ़ती है।
लक्षणः चेहरे, बाजू, टांग या शरीर के एक साईड में कमज़ोरी या सुन्नपन। बोलने, देखने या संतुलन बनाने में परेशानी
उपचारः स्ट्रोक एक मेडिकल एमरजेन्सी है। इसका जल्द से जल्द इलाज होना चाहिए।
जोड़ों में दर्द
कारणः ठंडी हवाओं और दबाव में बदलाव के कारण जोड़ों में दर्द बढ़ सकता हैं
लक्षणः जोड़ों में दर्द, पहले से मौजूद दर्द या आथ्राइटिस और गंभीर रूप ले सकता हैं
उपचारः सेहतमंद आहार लें, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन सी एवं के का सेवन करें। जोड़ों पर मसाज करें।
अस्थमा
कारणः ठंडी हवाओं से अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं, जिससे मरीज़ को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
लक्षणः सांस लेने में परेशानी, खांसी, छाती में घरघराहट की आवाज। कभी कभी लक्षण बहुत गंभीर हो जाते हैं।
उपचारःअस्थमा से पीड़ित मरीज़ों को सर्दियों में सावधानी बरतनी चाहिए। घर के अंदर रहें। ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से बचें। अगर बाहर जाएं तो नाक और मुंह को कपड़े से ढक लें। अपने दवाएं नियमित रूप से लें, इन्हेलर हमेशा अपने साथ रखें।

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