Tuesday, February 25, 2020
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टाटा सॉल्ट की अनूठी पहल में नमक के उपचारात्मक लाभों का उपयोग करके वायु प्रदुषण से होने वाली बीमारियों का किया जा रहा है इलाज

संवाददाता (दिल्ली) हर साल सर्दियों में वायु प्रदुषण का सामना करना दिल्लीवासियों के लिए एक गंभीर समस्या होती है। लेकिन इस साल वे सुकून की सांस ले सकते हैं क्योंकि वायु प्रदुषण के बुरे परिणामों का सामना करने में टाटा सॉल्ट की ‘सॉल्ट थेरेपी’ दिल्लीवासियों को मदद करेंगी, जहां नमक के उपचारात्मक लाभों का उपयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट्स बताते हैं कि दिल्ली की हवा में जहर घुलता जा रहा है, जिससे एलर्जी, अस्थमा, सीपीओडी और ब्रोंकायटिस जैसी बीमारियां तेजी से फ़ैल रही हैं। स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में अपने अग्रणी प्रयासों को जारी रखते हुए टाटा सॉल्ट ने वायु प्रदुषण की वजह से होने वाली बीमारियों का सामना करने में लोगों की मदद के लिए कदम बढ़ाये हैं। टाटा सॉल्ट ने सॉल्ट थेरेपी बनाकर दिल्लीवासियों को वायु प्रदुषण के हानिकारक परिणामों से बचने का लाभकारी इलाज मुहैया किया है। टाटा सॉल्ट की अनोखी मोबाईल सॉल्ट थेरेपी हौज़ खास, जनक पुरी जिला केंद्र और दिल्ली के अन्य प्रमुख इलाकों में उपलब्ध कराई गई है।

नमक थेरेपी को हैलो थेरेपी भी कहा जाता है, यह पूरी तरह से प्राकृतिक, गैर आक्रामक है और इसमें मरीज को कोई भी दवाई लेने की जरुरत नहीं होती। सांस फूलना, नाक और गले में जलन, एलर्जी, शरीर पर एलर्जी के लक्षणों से आराम दिलाने में यह नमक थेरेपी लाभकारी होती है। हैलो थेरेपी में एक कमरे में नमक की गुंफा की तरह वातावरण बना कर उसमें मरीज को बिठाकर सूखे नमक के बहुत ही छोटे छोटे कणों को सुंघाया जाता है। रिसर्च में पता चला है कि हैलो थेरेपी से सांस की नालियों की सूजन कम होती है, ब्रोन्कायल अस्थमा, ब्रोन्काइटिस और सीपीओडी के लक्षणों को कम करने में यह लाभकारी साबित हुआ है।

नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ़ रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन के कन्सल्टन्ट डॉ. निखिल मोदी ने बताया, नमक को सांस के साथ इनहेल करने से सांस की नलियों को खोलता है, बलगम को ढीला कर सांस लेने में आराम दिलाता है, इससे कफ को साफ़ किया जा सकता है, इंफेक्शन का खतरा कम होता है और बीमारी के लक्षणों से आराम मिलता है। अनुसंधान में पता चला है कि नमक थेरेपी से श्वसन क्रिया और मरीजों की प्रतिरक्षा स्थिति में सुधार होते हैं। सांस की बीमारियों से पीड़ितों के लिए यह खास फायदेमंद है। अस्थमा, ब्रोन्काइटिस, एलर्जी और सीपीओडी जैसी सांस की गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के लिए नमक थेरेपी प्राकृतिक उपचार का एक गुणकारी विकल्प है। यह बीमारियां वायु प्रदुषण की वजह से होती और बढ़ती हैं। मोबाईल ‘सॉल्ट थेरेपी’ से लोगों को वायु प्रदुषण के बुरे प्रभावों से लड़ने और सांस की बीमारियों को बढ़ने से रोकने के लिए एक सुविधाजनक विकल्प है। नमक से कई उपचारात्मक लाभ मिलते हैं और कई प्रकारों से उन्हें घर पर भी लिया जाता है। नमकीन भाप को सांस के जरिए इनहेल करना या नमक मिलाए हुए पानी से कुल्ला करना यह इनमें से कुछ आम इलाज हैं।

नमक थेरेपी का एक आम तौर पार लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक चलता है। सत्र के दौरान व्यक्ति को बस एक कुर्सी में आराम से बैठकर सांस लेते रहना होता है। नमक के छोटे छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर सांस की नलियों को खोलते हैं और व्यक्ति को सांस लेने में आराम महसूस होता है।

 

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