Thursday, February 20, 2020
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एलआईसी आईपीओ, एक शानदार कदम : नियंत्रण हटाये बगैर विलयन, मूल्य संरक्षण और धन निर्माण में सभी की सहभागिता

लेखक : कुणाल सांघवी, मुख्य वित्तीय अधिकारी, मेट्रोपोलिटन स्टॉक एक्सचेंज

सरकारी बीमा महारथी एलआईसी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) एक अभूतपूर्व महाघोषणा है। 31 लाख करोड़ से अधिक की निवल परिसंपत्ति वाला एलआईसी बाजार पूँजीकरण के सन्दर्भ में टीसीएस और आरआइएल से काफी बड़ा है। इस तरह, इसके आईपीओ द्वारा बाजार से लिक्विडिटी को सोख लेने की संभावना है।
किन्तु, एलआईसी आईपीओ के कामयाब होने का मतलब है कि सरकार आकर्षक निवेशों और मूलभूत संरचनाओं पर खर्च जारी रखेगी। इससे बजटीय घाटा की भरपाई में भी मदद मिलेगी।
एलआईसी ने 34 सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश कर रखा है और लगभग 5.61 लाख करोड़ रुपये के साथ इसके बीमा कारोबार की आमदनी देश में शीर्ष स्थान पर है जिसमें करीब 60% हिस्सा व्यक्तिगत बीमा और समूह बीमा से है, जिनकी आय क्रमशः रु.2.3 लाख करोड़ और रु.0.98 लाख करोड़ है।
सऊदी अरब केक अरामको की आईपीओ के विपरीत एलआईसी आईपीओ से विशाल ग्लोबल निवेशकों को आकर्षित होना चाहिए। एलआईसी आईपीओ में विदेशी निवेशकों की भागीदारी सरकार की लिक्विडिटी संबंधी चिंताओं को दूर करने की सफल रणनीति साबित हो सकती है। किन्तु, इसे एक आकर्षक प्रस्ताव बनाने के लिए सरकार को आईपीओ के निर्गम के सही समय और आकार का ध्यान रखना होगा।
एलआईसी की रु.2.6 लाख करोड़ का वार्षिक शुद्ध लाभ सरकार के समग्र खर्च के 10% के बराबर है। एलआईसी को वित्त वर्ष 2018 में अपने इक्विटी निवेशों पर लाभांश से लगभग रु.1.76 लाख करोड़ की कमाई हुयी थी। एसबीआई, आईसीआईसीआई, ऐक्सिस और आईडीबीआई बैंक जैसी अनेक ताकतवर कंपनियों में भी इसकी काफी बड़ी हिस्सेदारी है। एलआईसी के वित्तीय प्रदर्शन और ब्रांड के कारण सरकार के लिए इसके मूल्य के दरवाजे खोलने के लिए यह परिपक्व समय है। यह पिछले दशक में निजी क्षेत्र के लिए बीमा क्षेत्र को मुक्त बनाने की पृष्ठभूमि में एक शानदार कदम हो सकता है। इससे एलआईसी के संभावित धन निर्माण में खुदरा निवेशकों की भागीदारी में भी मदद मिलेगी।
इस वित्त वर्ष में घरेलू और वैश्विक मंदी के रुझानों की पृष्ठभूमि में बाजार की कमजोर हालत, न्यूनतर मूल्यांकन और संभावित कम वसूली के चलते सरकार अपने विनिवेश का लक्ष्य पूरा नहीं कर पायी थी। ये रूझान एलआईसी आईपीओ की सफलता के प्रमुख निर्धारक घटक भी होंगे।
एलआईसी पर अपना मालिकाना हक़ और नियंत्रण जारी रखने को लेकर सरकार की दृष्टि बिलकुल साफ़ है। यह सकारात्मक है, क्योंकि ऐसा होने से इस संगठन के कार्यकलाप और आईपीओ के बाद इसके प्रदर्शन में कोई बदलाव नहीं होगा। अन्य पीएसयू की तुलना में, जिनका व्यवसाय प्रतिस्पर्धा, विस्फोट, प्रबंधकीय समस्याएँ, पुरानी टेक्नोलॉजी और उत्पादों की माँग की कमी के कारण स्थिर नहीं है, एलआईसी लगातार जबरदस्त परिचालन कर रहा है और बाज़ार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखता है। यह स्टॉक एक्सचेंज को भी काफी व्यापक बनाएगा और बेहद ट्रैक्ड एमएससीएल सहित सम्पूर्ण वैश्विक सूचकांकों में भारत का वजन और दर्जा भी बदलेगा।
बीमा व्य वसाय व्यापक जन-साधारण का व्यवसाय होता है और एलआईसी अपने सुदृढ़ वितरण नेटवर्क के सहारे अपनी बीमा पॉलिसियों के लिए लोगों का भरोसा और विश्वास जीतने में सफल रहा है। यह महत्वपूर्ण है, वरना भारत में बीमा क्षेत्र पर विदेशी कंपनियों का कब्जा हो गया होता।
जहां सरकार ने नवीनतम ईटीएफ सहित विनिवेश के लिए घरेलू अवसरों का सफलतापूर्वक निर्माण किया है। वहीं एलआईसी के मामले में सरकार को ग्लोबल सॉवरेन फंड्स सहित विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ा हिस्सा आवंटित करने की गुंजाईश निकालनी चाहिए।
एलआईसी में अपने हिस्से को डाईल्युट करने से ज़रूरी नहीं कि सरकार अनुषंगी और निवेशित कंपनियों, जैसे कि एनएसई, ओएनजीसी, आरआईएल, आईओसी, इनफ़ोसिस, विप्रो, टीसीएस में अपना मताधिकार भी समाप्त कर रही है।
तमाम शानदार विपत्रों के बीच इस तरह का विशिष्ट और विशाल पोर्टफोलियो मिलना दुर्लभ होता है। मुझे लगता है कि अगर आईपीओ की सही कीमत और इष्टतम आकार मिल जाए तो सरकार को विनिवेश में आसानी होगी। सरकार जमीनी स्तर पर पहुँच की कोशिशों की उपेक्षा नहीं कर सकती, जो वैशिवक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ज़रूरी होगी।
जहां, सरकार एलआईसी में अपने हिस्से का विनिवेश कर रही है, वहीं इसे लाभ प्राप्त करने वाली कंपनियों को खरीदी करने पर भी विचार करना चाहिए जिनकी आरक्षित निधि संकट के समय अर्थव्यवस्था को सहारा दे सके। इन कंपनियों का स्वरुप गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और इंटेल जैसी आधुनिक डिजिटल कंपनियों के समान होना चाहिए। इससे वैश्विक आईटी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कम होगी और इसके विदेशी मुद्रा भण्डार तथा लाभों की रक्षा होगी। सरकार को चीन का अनुसरण करना चाहिए, जिसने टेक्नोलॉजी कंपनियों के निर्माण पर फोकस किया और उन्हें बल प्रदान किया है।

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