Friday, August 14, 2020
Home > दिल्ली > एन डी टी एफ ने स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत पर किया परिचर्चा का आयोजन

एन डी टी एफ ने स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत पर किया परिचर्चा का आयोजन

नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने सीमा पर चीनी हिमाकत के विरोध स्वरूप देशभर के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की है ।चीनी उत्पादों के बहिष्कार के प्रति जनता को जागरूक करने ,स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति एक माहौल का निर्माण करने के लिए एनडीटीएफ ने “चीनी आक्रामकता के प्रति भारत का विकल्प —बहिष्कार से आत्मनिर्भर भारत तक” विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया ।इस परिचर्चा में डॉ एन के कक्कड़, डॉ आई एम कपाही प्रो वी के कौल और डॉ अश्विनी महाजन ने हिस्सा लिया।
परिचर्चा का विषय प्रतिपादन करते हुए एनडीटीएफ अध्यक्ष डॉ ए के भागी ने बताया कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता आज बहुत ही प्रासंगिक विषय है। चीनी सामानों के बहिष्कार की बात तो करना आसान है लेकिन इस चुनौती से निपटना बहुत ही मुश्किल तो है लेकिन असम्भव नहीं है। पिछले कई वर्षों में विदेशी उत्पादों पर भारत की निर्भरता बढ़ी है और चीन उन देशों में से है जहां बड़ी मात्रा में भारत उत्पादों का आयात करता है लेकिन उसकी आक्रामकता और सीमा पर की गई धृष्टता को देखते हुए आज जरूरी हो गया है कि भारत स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के सवाल पर गंभीरता से विचार करें। प्रत्येक नागरिक के साथ-साथ समाज और देश के स्तर पर भी मंथन करने की आवश्यकता है ताकि सभी मिलकर इस चुनौती का बखूबी मुकाबला कर सकें।
दिल्ली विश्वविद्यालय के बिजनेस इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो वी के कौल ने परिचर्चा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चीन ने भूमंडलीकरण को अपनी आर्थिक और सैनिक ताकत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया अब वह इस ताकत का इस्तेमाल वित्तीय संकट और कोविड-19 की महामारी से ग्रस्त विश्व में खासकर पड़ोसी देशों के साथ अपनी आक्रामकता बढ़ाकर दुरुपयोग कर रहा है। भारत को भी अपनी नीति बदलनी होगी भारत को भी अब प्रौद्योगिकी क्रांति और उससे वाले बनने वाले अवसरों पर ज्यादा ध्यान देकर काम करने की जरूरत है प्रो कौल ने बताया कि भारत को चीन की मानसिकता , कार्य संस्कृति और मूल्य व्यवस्था कुछ समझ कर अपनी रणनीति बनानी होगी ताकि स्वदेशी के निर्माण और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए यथावश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्था बनाई जा सके। कोविड-19 महामारी में चीन की भूमिका को देखते हुए कई सारी कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाहती हैं और यह भारत के लिए एक अच्छा अवसर है कि वह इन कंपनियों को भारत में आकर्षित कर सकता है प्रो कौल ने बताया कि बतौर नागरिक भारतीयों को अपनी उपभोक्ता आदतों को भी बदलने की जरूरत है। नीतिगत स्तर पर भी अब हमें ज्यादा सजग होकर राष्ट्रहित के साथ विकास की अवधारणा को अपनाना होगा ।
डॉ अश्विनी महाजन ने कहा कि चीन पिछले दो दशक से दुनिया के बाजारों पर कब्जा करने की रणनीति अपना रहा है और वह इसमें काफी हद तक सफल भी हुआ है। इस रणनीति में चीन ने ट्रेडनीति का गलत इस्तेमाल करने से भी परहेज नहीं किया है। सस्ते चीनी उत्पादों और कम टैरिफ के चलते भारत में देशी उद्योग धंधे समाप्ति के कगार पर हैं। इन उद्योग धंधों को दोबारा से खड़ा करने की जरूरत है ।सीमा पर चीनी चीनी धृष्टता और कोविड-19 ने भारत के सामने एक अवसर दिया है कि वह स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को अपनाकर विकास का एक भारतीय मॉडल दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकता है ।डॉ महाजन ने कहा कि चीन की एकाधिकारवादी और प्रतिक्रियावादी नीतियों के चलते आज वह वैश्विक शांति को खतरा बन गया है । आज चीन के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होने की जरूरत है। भारत में भी चीनी माल के खिलाफ माहौल बन रहा है और जनता जागरूक होने लगी है। सरकार को भी सजग होकर स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत निर्माण की दिशा में ज्यादा तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि एंटी डंपिंग ड्यूटी और टैरिफ बढ़ाई जाए ताकि चीनी आयात पर रोक लगे और स्वदेशी उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहन मिले ।
परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए डॉ आई एम कपाही ने कहा कि चीन ने दुनिया के सामने अपने आर्थिक और सैन्य ताकत का एक हौवा खड़ा कर दिया है। पूरी दुनिया को और भारत को इस होवे से बाहर निकलने की आवश्यकता है भारत में भी क्षमताएं हैं और इन क्षमताओं का इस्तेमाल करके भारत एक स्वदेशी आर्थिक मॉडल और आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। डॉ एनके कक्कड़ ने भी स्वदेशी अपनाने की अपील करते हुए आत्मनिर्भर भारत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया ।इस कार्यक्रम का संचालन डॉ सलोनी गुप्ता और डॉक्टर मनोज केन ने किया। एनटीटीएफ महासचिवडॉ वी एस नेगी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय सैकड़ों प्राध्यापकों ने ने भागीदारी की जिन्होंने एक स्वर से चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *