Thursday, July 2, 2020
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द्वारा के.जी.एफ.एस ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग की सुविधा प्रदान की

द्वारा के.जी.एफ.एस, भारत का एक प्रमुख एनबीएफसी, ने सुदूर ग्रामीण भारत में वित्तीय सेवाओं तक पूरी पहुँच प्रदान करके हर व्यक्ति और हर उद्यम का अधिकतम वित्तीय कल्याण सुनिश्चित करने के मिशन के साथ, आज, 19 अप्रैल, 2020 के बाद से अपने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) के माध्यम से 7 करोड़ भारतीय रुपये मूल्य का लेनदेन होने की घोषणा की, जो उन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किए गए थे जहाँ वे अपना परिचालन करते हैं।

24 मार्च 2020 से लगाए गए लॉकडाउन के बाद से, ग्रामीणों, विशेष रूप से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर रोजमर्रा के कामकाजों के लिए पैसे निकालने का बोझ था, क्योंकि वे या तो बैंकों या एटीएम तक नहीं पहुँच पाते थे या कम पहुँच पाते थे। इस चुनौती को देखते हुए, द्वारा के.जी.एफ.एस ने एईपीएस की शुरुआत की और ग्रामीण आबादी को लाभ पहुंचाने के लिए 19 अप्रैल 2020 से इसे कार्यशील बनाया। यह सेवा ग्राहकों को समय पर उनके घर पर भी उपलब्ध कराई गई थी क्योंकि सरकार मनरेगा योजना के तहत मजदूरी और ब्व्टप्क् पैकेज के तहत राहत सीधे ग्रामीण लोगों के जन धन खाते में हस्तांतरित कर रही थी। आरबीएल बैंक के साथ साझेदारी में 19 अप्रैल को एक शाखा में पायलट के रूप में इसकी शुरुआत के साथ, अब इसे 300 से अधिक शाखाओं तक विस्तारित किया गया है जिनमें रोजाना 1000$ नकद निकासी होते हैं जिसकी रकम 25-30 लाख भारतीय रुपये प्रतिदिन है।

सम्पूर्ण सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए, द्वारा के.जी.एफ.एस के 1000 से अधिक वेल्थ मैनेजरों ने व्यापक जागरूकता फैलाई और संबंधित ग्राम प्रधानों की मदद से ग्रामीणों को एईपीएस से परिचित कराया और इस मंच के माध्यम से 36,000 से अधिक नकद निकासी और 60,000 बैलेंस की जानकारी की सुविधा प्रदान की है।

एईपीएस की सफलता पर टिप्पणी करते हुए,  जोबी सी.ओ., सीईओ, द्वारा के.जी.एफ.एस, ने कहा, लॉकडाउन और आरबीआई द्वारा ऋण के अधिस्थगन की घोषणा के बाद से, ऋण संवितरण और संग्रह मोर्चे पर हमारी शाखाओं में सीमित गतिविधियाँ हुई हैं और हमने इस अवसर का उपयोग हमारे ग्राहकों तक पहुंचने के लिए और मौजूदा स्थिति से उबरने में सहायता प्रदान करने के लिए किया है।

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