Monday, October 26, 2020
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एकम का वर्ल्ड पीस मेडिटेशन फेस्टिवल ऑनलाइन शुरू, पहले दिन पूरी दुनिया के 1 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े

संवाददाता (दिल्ली) दुनिया भर में शांति को बढ़ावा देने के मकसद से एकम का सबसे बड़ा ऑनलाइन मेडिटेशन फेस्टिवल 9 अगस्त से 15 अगस्त तक चलेगा। आंध्रप्रदेश में तिरुपित-टाडा के पास स्थित सफेद संगमरमर के मंदिर में बिना खंभों के बनाए गए एशिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर एकम से इस ऑनलाइन सेशन की स्ट्रीमिंग इस पूरे हफ्ते की जाएगी। पहले दिन इस ऑनलाइन सेशन में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने भाग लिया और विश्व में शांति को बढ़ावा देने के लिए ध्यान साधना की। 9 से 15 अगस्त तक यह लाइव स्ट्रीमिंग हर दिन 10 बजे सुबह और शाम को 6 बजे , 68 मिनट के लिए की जाएगी। इसमें आप भी भाग ले सकते हैं। यह सबसे बड़ा ऑनलाइन फेस्टिवल हैं, जिसमें 15 अगस्त तक 100 देशों, 300 शहरों, 2000 भारतीय गांवों और 2 हजार से ज्यादा शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शरीक होंगे।

एकम वर्ल्ड पीस फेस्टिवल के पहले दिन के अतिथि कैलाश सत्यार्थी थे। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने 90 हजार बच्चों को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाई है और उन्हें मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है।

आध्यात्मिक नेता और दार्शनिक श्री प्रीता जी और श्री कृष्णा जी ने एकम क्षेत्र का निर्माण किया। अब वह तीसरे एकम वर्ल्ड पीस फेस्टिवल की मेजबानी कर रहे हैं। उन्होंने दुनिया भर में लाखों लोगों को आत्मज्ञान का अनुभव कराने के लिए आध्यात्म की ओर प्रेरित किया है। इससे लाखों लोगों के परिवार में खुशियां लौटी हैं।
प्रीताजी और कृष्णा जी का मानना है कि व्यक्ति की चेतना सामाजिक चेतना से अलग नही है। शांतिप्रिय व्यक्ति अपने परिवार, दोस्तों और टीम के लिए एक गिफ्ट तो है ही। वह समाज को सकारात्मक दिशा में ले जाने और शांति को बढ़ावा देने में शक्तिशाली भूमिका निभाते हैं।

आध्यात्मिक नेता प्रीता ने कहा,एकम वर्ल्ड फीस फेस्टिवल के पहले दिन हमने दुनिया भर में चल रही तमाम जंग को खत्म करने और विश्व के देशों में शांति को बढ़ावा देने के लिए ध्यान साधना की। अब इस फेस्टिवल के बाकी दिनों में हम सामूहिक रूप से बच्चों, विभिन्न नस्ल, जाति और धर्मों, प्रकृति और वन्य जीवों, महिलाओं, आर्थिक स्थिति से मिलने वाली संतोषजनक शांति और पूरे मानव समाज मैं शांति को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से साधना करेंगे।

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