Friday, November 27, 2020
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सिटीजंस फोरम ने आजीविका कमाने जाते साइकिल चालक की मृत्यु की निंदा की, सड़कों पर मंडराते खतरों को समाप्त करने के लिए डेडिकेटेड इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग

संवाददाता (दिल्ली) ‘राइट टु वे’ और सड़क-यात्री संघर्ष वर्तमान दौर के उन प्रासंगिक मुद्दों में से एक है जिसका सामना लगभग हर आधुनिक शहर को करना पड़ रहा है। लगभग 11 लाख साइकिल चालकों वाला शहर दिल्ली घातक सड़क दुर्घटनाओं में देश में सबसे ऊपर है और पैदल चलने वालों से लेकर साइकिल चालक तक सड़क दुर्घटनाओं का शिकार बन रहे हैं। शहरी सड़कों को तैयार करने में मोटर गाड़ियों की रफ्तार को बढ़ाने पर जोर है, इस फेर में बुनियादी ढांचे की उपेक्षा हो रही है और पैदल-चालकों, साइकिल सवारों और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वालों के अधिकार दम तोड़ रहे हैं। सिटीजन फोरम ने राष्ट्रीय राजधानी में पिछले सप्ताह एक साइकल चालक की मौत की कड़ी निंदा करते हुए नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट (एनएमटी) को ध्यान में रख कर शहरी योजना नीति तैयार करने की अपनी मांग दोहराई है। जान गंवाने वाला शख्स सिरी फोर्ट में काम करता था और अपनी आजीविका कमाने साइकिल से अपने कार्यस्थल जा रहा था।

साइकिल को लाखों लोगों के लिए परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन और कोविड-19 के बाद उपजे हालात में भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले लोगों के लिए आवागमन का एक संभावित साधन बताते हुए सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी नेटवर्क इंडिया (एसयूएमएनईटी) के सदस्य, वल्र्ड कार-फ्री नेटवर्क और नेशनल साइक्लिस्ट यूनियन, दिल्ली के सदस्य राजेंद्र रवि ने कहा, ‘‘यह चिंता की बात है कि अभी भी दिल्ली में पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए आवागमन के संकट को दिल्ली के लोगों ने पूरी तरह नहीं समझा है। शहरी इलाकों के नागरिकों को साइकिल से आजीविका की सुविधा मिलती है और यह उनके लिए आजीविका का एक जरूरी साधन बन जाता है। अपनी आजीविका कमाने के लिए हर रोज एकतरफा लगभग 10 किलोमीटर साइकिल चलाने वाले निम्न-आय वर्ग के 80 प्रतिशत श्रमिक वर्ग के आवागमन के साधन की रक्षा करना बेहद जरूरी है और निश्चित रूप से सरकार को इसकी चिंता होनी चाहिए।‘‘

पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए शहरों में स्थायी गतिशीलता विकल्प वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध राहगिरी डे की को-फाउंडर सारिका पांडा भट्ट का कहना है, ‘भारत में साइकल चलाना बहुत कठिन होता जा रहा है बल्कि दिल्ली जैसे शहर में बेहद असुरक्षित भी है। सड़क का इस्तेमाल करने वालों की रक्षा करने वाले कानूनों का अभाव है। इस चलन से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, बहुत से लोग शौकिया साइकल चलाना शुरू करते हैं लेकिन बसों, ट्रकों और अन्य वाहनों की रेलमपेल के बीच सड़क पर सुरक्षित स्थान के लिए संघर्ष करने के बाद अपने इस शौक को तिलांजलि देने पर मजबूर हो जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में साइकिल चालकों के साथ सड़क दुर्घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसलिए, हमारी राज्यों से मांग है कि सड़कें तैयार करने में मोटर गाड़ियों की बजाय नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट यूजर्स का ध्यान रखने को प्राथमिकता दी जाए।’

संयोग से, सिटीजन फोरम द्वारा दिल्ली 2020 के लाइवलीहुड साइक्लिस्ट्स पर सर्वेक्षण में भी असुरक्षित सड़क निर्माण प्रथाओं और लापता साइकिलिंग बुनियादी ढांचे की कमी उजागर हुई है। आजीविका कमाने जाते कई साइकिल चालक समूहों में यात्रा करने के लिए पसंद करते हैं, ताकि मोटर चालकों के ‘अत्याचार’ से बच सकें, इनकी मांग है कि सड़कों पर उन्हें अपना हिस्सा भी मिले। साइकल सवार, इसलिए समूह बना कर चलते हैं ताकि अगर किसी मुसीबत में फंस जाए तो एक दूसरे की मदद कर सकें। सर्वेक्षण के आकलन से संकेत मिलता है कि घातक सड़क दुर्घटनाओं में साइकल सवारों और पैदल चलने वालों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है क्योंकि भारतीय शहरों में सड़कों को बनाने में वाहनों की उच्च गति को ध्यान में रखा जा रहा है, सभी के लिए सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने को नहीं।

दिल्ली के गौतमपुरी, बदरपुर में रहने वाली एक घरेलू कर्मचारी और शहरी महिला कामगार यूनियन की सदस्य मुद्रा ने कहा, ‘दिल्ली में साइकल सवारों का मरते-मरते बचना तो बहुत आम है, क्योंकि एक ही जगह पर कार भी चलती है और साइकल भी। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली सरकार बेहतर और स्थायी सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे के निर्माण की याचिका पर ध्यान देगी। सभी के लिए गतिशीलता को बाधित करती राजधानी की सड़कें एक चेतावनी हैं। इन खतरनाक सड़कों के कहर से न तो अमीर बच सकता है और न ही गरीब।’

हाल ही में ‘रुदिल्ली धड़कने दो’ नाम से शुरू किया गया एक अभियान दिल्ली के लिए स्वच्छ वायु समाधान पर काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों का एक सामूहिक प्रयास है, जो विशेष तौर पर साइकिल लेन सहित, बेहतर और स्थायी सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकता को समेटे हुए है। इस माह की शुरूआत में शुरू की गई इस पहल ने राजधानी को साइक्लिंग के लिए अनुकूल शहर बनाने में मदद करने के लिए एक आंदोलन शुरू किया है और दिल्ली सरकार से दिल्ली में गैर-मोटर चालित परिवहन नीति लाने की मांग के लिए याचिका पेश की है, जिसमें दो पहलुओं को प्राथमिकता दी गई हैः क) साइक्लिंग लेन को प्राथमिकता दी जाए और बी) साइक्लिंग तक कोविड-प्रूफ मोड में परिवहन के साधन के रूप में पहुंच हो।

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