Friday, October 23, 2020
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94% एमएसएमई ने लॉकडाउन के दौरान अपना परिचालन जारी रखने के लिए आईटी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सहारा लिया:टैली बिजनेस ओनर्स सेंटिमेंट्स स्‍टडी की रिपोर्ट्स में खुलासा

संवाददाता (दिल्ली) कोविड-19 महामारी के चलते भारत के सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमों (एमएसएमई) का डिजिटल रूपांतरण हुआ है। अब ये व्‍यवसाय कारोबार को निरंतर चालू रखने और स्‍वयं को आगे बढ़ाने के लिए तकनीक को अपना रहे हैं। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ माने जाने वाले, इन 6.8 मिलियन व्‍यवसायों का देश के सकल घरेलू उत्‍पाद में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान है। इसलिए, एमएसएमई द्वारा महामारी के बाद के माहौल में सूझबूझ के साथ स्‍वयं का प्रबंधन बेहद महत्‍वपूर्ण हो जाता है। टैली सॉल्‍यूशंस के कोविड-19 लॉकडाउन: बिजनेस ओनर्स सेंटिमेंट्स स्‍टडी में यह बताया गया है कि किस तरह से सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमों ने आपदा की स्थिति में तकनीक का सहारा लिया और अपने कारोबारी परिचालनों को संभालते हुए व्‍यावसायिक स्थिरता सुनिश्चित की। इस अध्‍ययन में यह उजागर किया गया है कि 82 प्रतिशत छोटे व्‍यवसाय बेहतर हो रहे मौजूदा नकद प्रवाह के साथ कारोबारी निरंतरता को लेकर आशान्वित हैं और उनमें 66 प्रतिशत अनलॉक 3.0 के बाद समय से वेतन का भुगतान कर पाने में सक्षम हैं।
व्‍यवसायों के लिए अवसरों का लाभ उठाने और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीकों को उपयोग में लाना अत्‍यावश्‍यक है। व्‍यवसाय मालिकों ने अच्‍छे आईटी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर होने के महत्‍व को समझा है, जिसकी झलक अध्‍ययन के निष्‍कर्षों से मिलती है। 94% व्‍यवसाय मालिकों ने तकनीक को अपनाया है जिससे उनके परिचालन को काफी लाभ पहुंचा है। लॉकडाउन लगने से लेकर हाल के अनलॉक 3.0 तक आईटी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर वाले कारोबारों की संख्‍या दोगुनी बढ़ गयी है। इसके अलावा, लॉकडाउन के बाद परिचालन न करने वाले व्‍यवसायों की संख्‍या काफी घटकर मात्र 5 प्रतिशत हो गयी है, जबकि लॉकडाउन के दौरान परिचालन न करने वाली व्‍यवसायों की संख्‍या 38 प्रतिशत थी।
एमएसएमई में देश भर में लगभग 110 मिलियन लोग काम करते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते रिवर्स माइग्रेशन बढ़ा जिसका प्रभाव छोटे व्‍यवसायों पर पड़ा जिनके पास सीमित कार्यबल बचा। हालांकि, तकनीक को अपनाने से व्‍यवसायों को उनके परिचालन सामान्‍य तरीके से जारी रखने में मदद मिली, जहां लॉकडाउन के दौरान कार्य के लिए उपलब्‍ध कर्मचारियों की संख्‍या 44 प्रतिशत रही, वहीं लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद यह प्रतिशत बढ़कर 66 हो गया। यही नहीं, इन मालिकों ने अपने कार्यबल को प्राथमिकता दी, और 57 प्रतिशत मालिकों ने लॉकडाउन के दौरान भी समय से वेतन दिये, जिनका प्रतिशत लॉकडाउन में छूट दिये जाने के बाद बढ़कर 66 प्रतिशत हो गया।

टैली सॉल्‍यूशंस के हेड – इंडिया बिजनेस, श्री जॉयसी रे ने कहा, ”सबसे बुरी तरह से प्रभावित क्षेत्रों में से एक होने के बावजूद, एमएसएमई ने जोरदार तरीके से वापसी की है और नवाचार एवं अनुकूलनशीलता के जरिए इस स्थिति का सामना किया है। इन व्‍यवसायों ने न केवल स्थिरता सुनिश्चित की है, बल्कि इस समय में अपने कर्मचारियों को सहारा देकर असाधारण नैतिक आचरण भी प्रदर्शित किया है। उनकी फौलादी सोच विपरीत परिस्थितियों में हम सभी के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
अवसरों का लाभ उठाने और कारोबार को बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग अत्‍यावश्‍यक है। हालांकि एमएसएमई सामान्‍य स्थिति में पहुंचने के लिए लगातार प्रयत्‍नशील हैं, लेकिन मजबूती के साथ वापसी करने के लिए, उन्‍हें सही तकनीकी उपकरणों एवं व्‍यवसाय प्रबंधन समाधानों को उपयोग में लाना होगा। इससे परिचालन सरल हो सकेगा, दूर से काम करने का सक्षमता आयेगी, खर्च को यथोचित बनाये रखा जा सकेगा और बेहतर नकद एवं इन्‍वेंट्री प्रबंधन हो सकेगा – इस प्रकार, इन सभी के सामूहिक प्रभाव से कारोबार में स्थिरता आयेगी और कारोबार आगे बढ़ेगा।

टैली सॉल्‍यूशंस के कोविड-19 लॉकडाउन: बिजनेस ओनर्स सेंटिमेंट्स स्‍टडी में इस बात का विश्‍लेषण किया गया है कि व्‍यवसायों ने किस तरह से प्राथमिक कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान और अनलॉक 1.0 के बाद अपने परिचालनों को संभाला और किस तरह से उन्‍होंने कर्मचारी अवधारण नीतियों, आईटी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, नकद प्रवाह प्रबंधन व अन्‍य के जरिए व्‍यवसायों का परिचालन किया।

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