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जल प्रबंधन में ही निहित है कृषि की स्थायी वृद्धि

आर जी अग्रवाल चेयरमैन धानुका एग्रीटेक बढ़ती जनसंख्या, अपर्याप्त सरकारी योजना, बढ़ते काॅर्पोरेटाइजेशन, औद्योगिक और मानवीय अपशिष्ट, आदि के कारण भारत इतिहास का सबसे बड़ा जल संकट झेल रहा है। नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट के एक हालिया अध्ययन के मुताबिक विश्व भर में भूमिगत जल सबसे अधिक उत्तर भारत से गायब हो रहा

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नारी के बिना अधूरा है मानव : लाल बिहारी लाल

हमारी भारतीय संस्कृति ने सदैव ही नारी जाति का स्थान पूज्यनीय एवं वन्दनीय रहा है, नारी का रूप चाहे मां के रूप में हो,बहन के रुप में हो, बेटी के रुप में हो या फिर पत्नी के रूप में हो सभी रुपों में  नारी का सम्मान किया जाता है।  यह बात आदिकाल से

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नारी के सम्मान का विचार होना चाहिये

लाल बिहारी लाल, नई दिल्ली नारी नाड़ी की तरह करती है काम धाम नारी के सम्मान का विचार होना चाहिये पुरुष प्रधान सदियों से है समाज यह नारी आगे लाने पर विचार होना चाहिये रुढ़ीवादी छोडो अब जोड़ो नाता नारी से नर नारी सबका उद्धार होना चाहिये ठान ले अगर कुछ करने का जग में तो लाख-लाख बधाये

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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में नारी की ललकार

कामिनी वर्मा एसोसिएट प्रोफेसर काशी नरेश राजकीय महाविद्यालय ज्ञानपुर, भदोही ( उत्तर प्रदेश ) 10 मई 1857 मेरठ छावनी में सैनिकों के आक्रोश से उत्पन्न संघर्ष भारतीय इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से उल्लिखित है , जिसमें शीघ्र ही ब्रिटिश शासकों की शोषणकारी नीतिओं और दमनात्मक कार्यवाही से पीड़ित शासक व विशाल

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प्यार के अग्रदूत थे- संत वेलेटाइन (14 फऱवरी वेलेटाइन डे पर विशेष)

लाल बिहारी लाल 1260 में संकलित की गई  एक पुस्तक  'ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन' में सेंट वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। उसका  मानना था कि लोग पारिवारिक मोह माया एंव  प्रेम विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती

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एक मंदीर जहां पर दान पेटी नहीं..पर है दोनो वक्त रोटी! – श्री जलाराम मंदिर, विरपुर

गोपाल खेताणी जलाराम बापा का जन्म सन्‌ 1799 में गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रधान ठक्कर और माँ का नाम राजबाई था। बापा की माँ एक धार्मिक महिला थी, जो साधु-सन्तों की बहुत सेवा करती थी। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर संत रघुवीर दास जी ने

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26 जनवरी…बचपन की ख्वाहीश जो साकार हुई!

 गोपाल खेताणी २६ जनवरी... एक ऐसा दिन जब मैं और मेरे दोस्त स्कूल के दिनो में ध्वजवंदन कर तुरंत घर पे आकर टीवी पर चीपक जाते थे....हां .. परेड देखने । आप सब को भी वो दिन याद आ रहे होंगे.. हैं ना? स्कूलींग राजकोट (गुजरात) में हुइ। उस समय में सोचता

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“शौर्यम..दक्षम..युध्धेय..! बलिदान परम धर्म !

गोपाल खेताणी ये नया हिंदुस्तान है...ये घर में घुसेगा भी और मारेगा भी।   कई लोग उडी फिल्म देख चुके होंगे..तो कई लोग इसके बारे में सुन चुके होंगे। मैं यहां मूवी का रिव्यु नहीं लिख रहा। पर मैं लिखना चाहता हुं उन अल्फाझों को जो दील पे दस्तक दे रहे हैं। कुछ लोगों

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ताकि सिर्फ डिग्रीधारी न बनें बच्चे

विश्वजीत राहा (स्वतंत्र टिप्पणीकार) वोट बैंक के जरिये सत्ता हासिल करने की सियासत ने इन दिनों इतना शोर मचा रखा है कि सरकार के अच्छे कार्यों की चर्चा अब कम ही हो पाती है। बीते संसद सत्र में लोक कल्याण से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित हुआ, पर चर्चा वोट बैंक

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सवर्ण आरक्षण से उपजे सवाल

विश्वजीत राहा (स्वतंत्र टिप्पणीकार) अपने कार्यकाल के अंतिम सत्र में मोदी सरकार ने सवर्णों के लिए तथाकथित आरक्षण का मास्टर स्ट्रोक खेल कर सभी विपक्षी पार्टियों को सकते में डाल दिया। द्रमुक व राजद जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को छोड़कर कोई भी विपक्षी पार्टी इस बिल को विरोध करने का हिम्मत तक

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