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70 साल का राष्ट्र विरोधी विभाजन एक झटके में समाप्त – मोदी है तो मुमकिन है

तिलक राज कटारिया कुछ ऐसे हादसात भी गुजरे हैं तारीख में, लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई, और यही हुआ है हमारे आजाद भारत के साथ। वह लम्हें जिनमें कि कश्मीर की जीती हुई बाजी को संयुक्त राष्ट्र में मध्यस्थता हेतु भेजकर देश के सीने में एक नासूर कर दिया

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पर्यावरण

तिलक राज कटारिया, नेता सदन, उत्तरी दिल्ली नगर निगम वर्तमान समय में दिन प्रति दिन पृथ्वी का तापमान और ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ती ही जा रही है। इन सबके विपरीत प्रभाव भी हमारी आंखों के सामने है। कहीं बाढ़, कहीं सुखा, तुफान, आगजनी व सुनामी जैसी आपदाएं आए दिन विकराल रूप

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मानसिक विकृति के लिए दोषी कौन?

शम्भू पंवार समाज में बढ़ती मानसिक विकृति के लिए सही मायने में दोषी कौन है? समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को इस विषय में गहरा चिंतन करना होगा। नारी को जहां एक शक्ति का रूप माना जाता है। उसी शक्ति को वर्तमान हालात में आए दिन वहशी दरिंदे अपनी हवस का शिकार

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विकास के लिए जनसंख्या दर को कम करना होगा

लाल बिहारी लाल  सन 1987 में विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार गई तभी से सारी दुनिया में जनसंख्या रोकने के लिए जागरुकता की शुरुआत के क्रम में 1987 से हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाते हैं। आज सारी दुनिया की 90% आबादी इसके 10% भाग में निवास करती है। विश्व

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छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण बचाया जा सकता है- लाल बिहारी लाल

इस संसार में कई ग्रह एवं उपग्रह हैं पर पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन एवं जीव पाये जाते हैं। धरती कभी आग का गोला था, जलवायु ने इसे रहने लायक बनाया और प्रकृति ने मुनष्यों सहित समस्त जीवों, पेड़-पौधों का क्रमिक विकास किया। प्रकृति और

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पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका

डॉ दीपा शुक्ला आवास विकास कालोनी लखीमपुर- खीरी पर्यावरण के संरक्षण में महिलाओं की अहम भूमिका रही है। अलग -अलग विद्वानों ने अपने ढंग से पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका को परिभाषित किया है। कार्ल मार्क्स के अनुसार,"कोई भी बड़ा सामाजिक परिवर्तन महिलाओं के बिना नहीं हो सकता है।",कोफ़ी अन्नान के अनुसार,

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स्वीकार करो मेरा नमन, बंदन ब अभिनन्दन

विनोद तकिया वाला स्वतंत्र पत्रकार   मैं नत मस्तक हूँ... भारत के जनमानस के समक्ष.... जनमानस ... जिसे बरगलाने में राहुल- ममता- माया - ओबैसी - जाति- धर्म के ठेकेदारों ने कोई कमी नहीं छोड़ी... मैं नत मस्तक हूँ..... काल के कपाल के समक्ष..... कपाल... जिस पर आज मेरे भारत की नई इबारत लिखी गई.... मंदिर के घण्ट

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दर्द मिटाए मधुशाला

नीरज त्यागी ग़ाज़ियाबाद  सुना  है   बहुत  मंद  उजाले   है   मधुशाला  में , शायद जुगनू भटकते है वहाँ दिन ढले पैमानों में, शब्दो को यूँ  तो  हर कोई गुनगुनाता है अक्सर, मतलब समझ आता है उनको जो खुद को डूबा आया    मधुशाला    के    मय    के   प्यालो   में , मधुशाला में कहीं किसी को आईने

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