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स्वीकार करो मेरा नमन, बंदन ब अभिनन्दन

विनोद तकिया वाला स्वतंत्र पत्रकार   मैं नत मस्तक हूँ... भारत के जनमानस के समक्ष.... जनमानस ... जिसे बरगलाने में राहुल- ममता- माया - ओबैसी - जाति- धर्म के ठेकेदारों ने कोई कमी नहीं छोड़ी... मैं नत मस्तक हूँ..... काल के कपाल के समक्ष..... कपाल... जिस पर आज मेरे भारत की नई इबारत लिखी गई.... मंदिर के घण्ट

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दर्द मिटाए मधुशाला

नीरज त्यागी ग़ाज़ियाबाद  सुना  है   बहुत  मंद  उजाले   है   मधुशाला  में , शायद जुगनू भटकते है वहाँ दिन ढले पैमानों में, शब्दो को यूँ  तो  हर कोई गुनगुनाता है अक्सर, मतलब समझ आता है उनको जो खुद को डूबा आया    मधुशाला    के    मय    के   प्यालो   में , मधुशाला में कहीं किसी को आईने

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देश मेरे.. देश मेरे… मेरी जान है तू !

गोपाल खेतानी                                                           देश मेरे.. देश मेरे ..मेरी जान है तू,देश मेरे... देश मेरे.. मेरी शान है तू।" आज का दिन, मेरा जन्म दिन।

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ए माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी..

लेखिका - डॉ कामिनी वर्मा ज्ञानपुर , भदोही ( उत्तर प्रदेश ) ईश्वर हर किसी के पास नहीं पहुँच पाया होगा, शायद इसीलिए अपनी प्रतिकृति माँ के रूप में पृथ्वी पर भेज दी। माँ संतान के लिए ईश्वर का अद्वितीय उपहार है। माँ की दुआओं में दुनिया की सारी दौलत है ,

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मेरा रुदन तुम्हारी हँसी

डॉ दीपा शुक्ला सहायक अध्यापिका उ. प्रा . वि. सढौना लखीमपुर खीरी " मेरा रुदन तुम्हारी हँसी " मेरे जीवन के अंधियारे पथ पर चलते हुए मेरी बदहाली में , मेरी फटेहाली में, मेरी फ़टी हुई जूतियों में ठुकी हुई कील जब मेरे पाँव को करती घायल तो ,अनायास ही बिखरती मुस्कान तुम्हारे चेहरे पर और तुम्हारी दूध जैसी श्वेत दन्त पंक्ति मुझे

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भोली सी चिड़िया

डॉ दीपा शुक्ला सहायक अध्यापिका उ. प्रा .वि .सढौना लखीमपुर खीरी                                                         मैं तो इक भोली सी चिड़िया, निर्मम जग को क्या पहचानूँ? अद्भुत एक आखेटक आया , ऐसा

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मजदूरों के हितों की रक्षा जरुरी है – लाल बिहारी लाल

जब इस धरती का निर्माण हुआ तो इसमें पहले मजदूर के रुप में त्रिदेवों –ब्रम्हा, विष्णु एवं महेश ने काम किया। फिर अलग अलग रुप से काम को श्रेणियों में बांट दिया गया। निर्माण का काम ब्रम्हा जी,कार्यपालिका का काम विष्णु जी और फिर न्यायपालिका का काम भगवान महादेव को

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धरा को बचाने के लिए जनभागिदारी जरुरी है- लाल बिहारी लाल

देश दुनिया में पर्यावरण का तेजी से क्षति होते देख अमेरिकी सीनेटर जेराल्ट नेल्सन ने 7 सितंबर 1969 को घोषणा की कि 1970 के बसंत में पर्यावरण पर राष्ट्रब्यापी जन साधारण प्रदर्शन किया जायेगा। उनकी मुहिम रंग लायी और इसमें 20 लाख से अधिक लोगो ने भाग लिया। और उनके

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संविधान में स्त्रियों को गरिमामयी स्थान देने के लिए डॉ अम्बेडकर के सद्प्रयास

डॉ कामिनी वर्मा समाज से अन्याय और असमानता समाप्त करने के लिए सतत संघर्षरत डॉ भीम राव अम्बेडकर का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है ।स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के अभाव मे आदर्शसमाज स्थापित नही हो सकता।पितृ सत्ता प्रधान भारतीय समाज मे नारी की स्थिति या तो देवी

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