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प्रतिभाओं को नए पंख देता दिख रहा है यह लॉक डाउन

पूरी दुनिया में चल रहे नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देश का हर व्यक्ति अपने घरों में ही क़ैद होकर रहा गया है| यूँ तो कामकाजी लोगों के स्वभाव में है छुट्टियों का बहाना ढूंढना, पर जब से पूरा देश लॉक डाउन में ठप पड़ा है,

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दर्द में डूबा हुआ है हर फसाना आज कल, भूल बैठा हर इक परिंदा मुस्कुराना आजकल

हैदर अली अशर्फी "दर्द में डूबा हुआ है हर फसाना आज कल, भूल बैठा हर इक परिंदा मुस्कुराना आजकल" धर्म जाती या वर्ग पर आधारित सोच न तो राजनीति को आगे बढ़ा सकती है न ही देश को यह। बात कमोबेश हर राजनीतिक दल और राष्ट्रीय नेताओं ने एक दौर में मानी। लेकिन

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साईबर धोखे का शिकार होने से बचें

हम टेक्नॉलॉजी के युग में जी रहे हैं, जहां हम पहले से ज्यादा कनेक्टेड हैं। चाहे इन्फॉर्मेशन हो, उत्पाद या सेवाएं, हमें हर चीज़ हर जगह और हर वक्त उपलब्ध है। आज टेक्नॉलॉजी ने उपभोक्ताओं को पारंपरिक ऑफलाईन माध्यमों से गतिशील ऑनलाईन दुनिया में लाकर खड़ा कर दिया है। दुनिया में सबसे तेजी से विकसित होते हुए रिटेल बाजारों में से एक के रूप में हमारे देश में डिजिटल खरीददारों की संख्या 2020 तक 330 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। आने वाले सालों में यह संख्या कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगी। जहां एक तरफ तेजी से होते डिजिटल परिवर्तन के अनेक फायदे हैं, तो वहीं ई-वर्ल्ड ने साईबर धोखाधड़ी के द्वार भी खोल दिए हैं। इस साल टेकआर्क की एक रिपोर्ट में सामने आया कि 2018 में ईकॉमर्स ने भारत में होने वाले कुल एड धोखाधड़ी में 51 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दिया। एक दूसरी रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत दुनिया में सर्वोच्च फिशिंग होस्टिंग देशों की सूची में दूसरे स्थान पर है। जोखिम स्पष्ट है और बिना सावधानी के आप साईबर धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं। इसलिए यहां आपको कुछ सावधानियों के बारे में बताया जा रहा है। सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि अपनी पर्सनल बैंकिंग एवं सिक्योरिटी डिटेल्स की जानकारी, जैसे पासवर्ड, ओटीपी किसी भी टेलीकॉलर या किसी अन्य को न बताएं, क्योंकि ई-कॉमर्स या इंटरनेट कंपनी का कोई भी कस्टमर सपोर्ट सेंटर कभी भी आपसे आपकी पर्सनल बैंकिंग की जानकारी नहीं मांगता। इस नियम का कड़ा पालन करें। इसके अलावा मेकमाईट्रिप आपको कुछ सुझाव दे रहा है, जिनकी मदद से आप खुद को साईबर धोखे का शिकार होने से बचा सकते हैं – आपको गूगल सर्च परिणाम या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा मिलने वाले जाली कॉन्टैक्ट नंबर्स के प्रति सतर्क रहना चाहिए। ई-कॉमर्स/इंटरनेट कंपनी से सदैव उनके रजिस्टर्ड या आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर ही संपर्क करें। इसलिए कस्टमर केयर नंबर डायल करने से पहले उसे दोबारा जाँच कर नंबर की पुष्टि कर लें। किसी भी टेलीकॉलर के निवेदन पर ऐप्स इंस्टॉल न करें क्योंकि इसका उपयोग जालसाज आपके सेव किए गए कार्ड/खाते की जानकारी प्राप्त करने तथा आपके फोन को दूर से ही नियंत्रित करने के लिए कर सकते हैं। आपको अपने क्रेडिट कार्ड, बैंकिंग का विवरण या भुगतान संबंधी जानकारी केवल ईकॉमर्स/इंटरनेट कंपनी की सुरक्षित वेबसाईट के माध्यम से विनिमय करते वक्त ही देनी चाहिए। अनपेक्षित ईमेल या टेलीकॉलर्स के माध्यम से किसी भी तरह के निवेश के ऑफर का उत्तर देने के दौरान सावधानी बरतें। बहुत अच्छी दिखने वाली डील्स पर प्रतिक्रिया देते वक्त बहुत सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि कई बार जालसाज फिशिंग के प्रयास के तहत आपको बेहतरीन डील या ऑफर दे सकते हैं। अंत में सबसे जरूरी बात। आप खुद वॉचडॉग बनकर सुरक्षा बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। यदि आपके कोई व्यक्ति आपकी गोपनीय जानकारी मांगे, तो आपको फौरन इंटरनेट कंपनी को सूचित करना चाहिए या अपने बैंक को तत्काल इसकी सूचना देनी चाहिए। जब भी आप ई-शॉपिंग करें, आपको उपरोक्त बातें ध्यान में रखनी चाहिए, जिससे आप उन साईबर अपराधियों से सुरक्षित रहेंगे, जो आपके बैंक खाते या वॉलेट से पैसे चुराने की ताक में रहते हैं।

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सेहत के लिए हानिकारक है- प्लास्टिक इससे बचे

लाल बिहारी लाल आज भागमभाग भरी  जिंदगी  में  मानव इस कदर उलझ  गया   है  कि  वो न अपने सेहत  पे औऱ  नाहीं प्रकृति  को बचाने  के प्रति ध्यान दे पाता हैं। इसके परिणामस्वरुप वातावरण  दूषित और  स्वंय  बिमार  रहने  लगा है। यूं तो प्रकृति  को सबसे ज्यादा खतरा  प्रदूषण से है

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