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ग्रीन पटाखे अगले वर्ष से लागू किये जाएँ -कैट

संवाददाता(दिल्ली) दिल्ली एनसीआर में लाखों लोगों को रोजी रोटी पटाखे बेचने से चलती है इस बात को उठाते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस दिवाली पर केवल ग्रीन पटाखे ही बेचने के आदेश दिए जाने पर गहरी चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है की वो अपने निर्णय पर पुन : विचार करलाखों लोगों की रोजी रोटी को बचाते हुए ग्रीन पटाखे बेचना अगले वर्ष से लागू करे एवं इस वर्ष पारम्परिक रूप से बिकने वाले पटाखों को दिल्ली एनसीआर में बिक्री की अनुमति दे ! कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने पर्यावरण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंताओं से सहमति व्यक्त करते हुए कहा की पर्यावरण की सुरक्षा बेहद आवश्यक है लेकिन ग्रीन पटाखे एक नया विचार है और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी नहीं है !यहाँ तक की ग्रीन पटाखों की कोई परिभाषा भी नहीं है ! व्यापारियों अथवा उपभोक्ताओं को यह पता तक नहीं है की ग्रीन पटाखे किसको कहते हैं और इसीलिए बाज़ार में ग्रीन पटाखे उपलब्ध नहीं है जबकि बाज़ार पारम्परिक पटाखों से भरा पड़ा है ! एक अनुमान के अनुसार दिल्ली एनसीआर में लगभग 500 करोड़ रुपये के पटाखों का स्टॉक है ! इस स्टॉक का क्या होगा यह एक बड़ा सवाल है ! इतने कम समय में यह स्टॉक अन्य राज्यों में भी भेजा जा नहीं सकता और अन्य राज्यों में पहले से ही उनकी मांग के अनुरूप स्टॉक पड़ा हुआ है ! खंडेलवाल ने कहा की पटाखे बेचने का व्यपार सीजनल व्यापार है और लाखों लोग अपनी साल भर की रोजी रोटी दिवाली के त्योहारी सीजन से ही कमाते हैं !ऐसे लोगों के लिए भूखों मरने की स्तिथि आ जाएगी !इस मुद्दे पर आर्थिक और मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए सुप्रीम कोर्ट को पटाखों का व्यापार करने वाले लोगों को कुछ समय देना चाहिए और ग्रीन पटाखों को अगले वर्ष से बिक्री के लिए लागू करना चाहिए ताकि पटाखे निर्माता केवल ग्रीन पटाखे ही बनायें और दिल्ली एनसीआर में व्यापारी अन्य राज्यों के निर्माताओं से केवल ग्रीन पटाखे ही खरीदें !

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